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NILP Survey Kaise Kare: न्यू इंडिया लिटरेसी प्रोग्राम (NILP)

 

न्यू इंडिया लिटरेसी प्रोग्राम (एनआईएलपी)

मंत्रालय द्वारा अब से “सभी के लिए शिक्षा” (एजुकेशन फॉर ऑल) शब्द का उपयोग “वयस्क शिक्षा”  (एडल्ट एजुकेशन) के स्थान पर किया जाएगा।…

NILP कार्यक्रम क्या है ?साथ ही इस कार्यक्रम का पूरा फ्रेमवर्क क्या है?

[NILP Survey Kaise Kare]

NILP Survey Kaise Kare ?निरक्षर कौन होंगे? उनकी आयु क्या होगी ? निरक्षर को पढ़ाने का काम अर्थात साक्षर बनाने का काम कौन करेंगे ? किसी को निरीक्षर किस आधार पर माना जाएगा ? वॉलिंटियर टीचर( VT) स्वयंसेवक कौन होंगे ? वॉलिंटियर टीचर को मानदेय मिलेगा या नहीं मिलेगा ? VT और Learner का चिन्हीकरण करने का काम, एप में एंट्री का काम अर्थात सर्वे करने का काम कौन करेगा? क्या सर्वे सभी घरों का जाएगा ?

15 या 15 वर्ष से ऊपर के निरक्षरों / असाक्षरों/ गैर साक्षरो को चिन्हित करके उन्हें साक्षर बनाना है। वितीय सत्र 2022 से 2027 तक इस कार्यक्रम के संचालन की योजना है। इन असाक्षरों को हम Learner कहेंगे तथा इन्हें पढ़ाने का काम volunteer teachers (स्वयंसेवक) VT द्वारा किया जाएगा । इन स्वयंसेवकों VT को किसी प्रकार का कोई मानदेय देय नहीं होगा। अब जान लेते हैं Learmer (असाक्षर) कौन होंगे ? 15 या 15 साल से अधिक के ऐसे नागरिक जिन्हें भाषा को समझ के साथ पढ़ना नहीं आता है, जो अपने विचारों को लिखकर व्यक्त नहीं कर पाते हैं साथ ही गणित की संक्रियाओ का प्रयोग अपने हदैनिक जीवन में नहीं कर पा रहे हैं । उन्हें हम असाक्षर कहेंगे । अब साथियों बात कर लेते हैं Volunteer teachers VT की VT कौन होंगे ? VT अर्थात स्वयंसेवक कक्षा 5 और उससे ऊपर के स्कूली छात्र होंगे जो अपने ही परिवार के गैर साक्षर सदस्यों को साक्षर करेंगे। इनके अतिरिक्त पंचायती राज संस्थाओं, आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं, आशा कार्यकर्ताओं से वॉलिंटियर के रूप में सहायता प्राप्त की जाएगी औरएनवाईकेएस एनएसएस , स्काउट गाइड और एनसीसी स्वयंसेवक भी भाग लेंगे। विद्यांजलि पोर्टल के माध्यम से परोपकारी/ सीएसआर संगठनों की भागीदारी होगी।[NILP Survey Kaise Kare]

NILP FULL FORM: NEW INDIA LITERACY PROGRAMME[नव भारत साक्षरता कार्यक्रम ]

Learner तथा VT के बारे में जानने के बाद अब बात कर लेते हैं कि इनका चिन्हीकरण, इनकी ऐप में एंट्री आदि की प्रक्रिया कैसे संचालित की जाएगी तथा कौन करेगा ?

NILP Survey Kaise Kare

साथियों इस कार्य को करने के लिए पूरा ऑनलाइन प्लेटफॉर्म तैयार किया गया है जो इस प्रकार है –

[NILP Survey Kaise Kare]

ऑनलाइन प्लेटफॉर्म  कैसे काम करे?

District user (NILP portal पर )
Block user (NILP portal पर)

District user (NILP portal पर)
Block user (NILP portal पर)
Cluster user (NILP portal y)
Head Master (NILP portal qR)
School teachers (surveyor)
(App install Login)
Learner
VT (volunteer teachers)

का चिन्हीकरण, NILP एप पर Learrner, VT की एंट्री करना, आपस में टैग करना

VT द्वाराLearner को साक्षर बनाना

(डिजिटल साक्षरता, वित्तीय साक्षरता, कानूनी साक्षरता, आपदा प्रबंधन कौशल, बाल्य देखभाल और पोषण, वाणिज्य कौशल, स्वास्थ्य और
स्वच्छता साक्षरता, आहार संबंधी आदतों के बारे में जागरूकता, परिवार कल्याण के मु्दे व्यायाम ,योग तंबाकू का उपयोग बंद करना प्राथमिक चिकित्सा देखभाल, सड़क यातायात दुर्घटना आदि का प्रबंधन, मतदाता पंजीकरण आदि के बारे में जागरूकता ।)

 प्रधानाध्यापक अथात HM सर्वेयर किसे बनाएंगे और कैसे बनाएंगे ?

[NILP Survey Kaise Kare]

प्रधानाध्यपक अपने स्कूल के किसी भी सहायक अध्यापक को सुर्वेयएर NILP की ऑफिसियल वेबसाईट लॉगिन करके बनाएंगे लॉगिन id और पासवर्ड प्रधानाध्यापक के ईमेल id या मोबाईल नंबर पर प्राप्त होंगे | उसके बाद सुर्वेयएर के मोबाईल नंबर नंबर ऐप के माध्यम से लॉगिन करके सुर्वे करेंगे |

सर्वेयरLeaner (निरक्षर) और VT का चिन्हीकरण करके मोबाइल ऐप में उनकी एंट्री कैसे करेंगे?

[NILP Survey Kaise Kare]

उन्हें मोबाइल पर आपस में टैग कैसे करेंगे ? यदि कोई गलत एंट्री हो गई है तो उसका समाधान कैसे करेंगे ? इंटरनेट की आवश्यकता कब पड़ेगी ? App में farmily
head details क्या भूमिका है ? Mark as None से क्या तात्पर्य है?

App पर समस्या का समाधान कैसे करे ?

[NILP Survey Kaise Kare]

न्यू इंडिया लिटरेसी प्रोग्राम के प्रमुख उद्देश्य

[NILP Survey Kaise Kare]

एनएलआईपी योजना का उद्देश्य न केवल ‘मूलभूत साक्षरता एवं संख्यात्मकता‘ प्रदान करना है बल्कि अन्य घटकों को भी शामिल करना है जो 21वीं सदी के नागरिक के लिए आवश्यक हैं जैसे कि

महत्वपूर्ण जीवन कौशल (इसमें सम्मिलित हैं वित्तीय साक्षरता, डिजिटल साक्षरता, व्यावसायिक कौशल, स्वास्थ्य देखभाल एवं जागरूकता, बाल देखभाल तथा शिक्षा एवं परिवार कल्याण);
व्यावसायिक कौशल विकास (स्थानीय रोजगार प्राप्त करने की दृष्टि से);
बुनियादी शिक्षा (प्रारंभिक, मध्य एवं माध्यमिक स्तर की समकक्षता सहित); तथा
सतत शिक्षा (इसमें सम्मिलित हैं कला, विज्ञान, प्रौद्योगिकी, संस्कृति, खेल एवं मनोरंजन के साथ-साथ रुचि के अन्य विषयों या स्थानीय शिक्षार्थियों के लिए उपयोग में समग्र वयस्क शिक्षा पाठ्यक्रम, जैसे महत्वपूर्ण जीवन कौशल पर अधिक उन्नत सामग्री)।

न्यू इंडिया लिटरेसी प्रोग्राम (एनआईएलपी)- सरकार द्वारा उठाए गए कदम

[NILP Survey Kaise Kare]

अंडमान तथा निकोबार द्वीप समूह सहित देश में कार्यक्रम के प्रभावी कार्यान्वयन एवं कार्यक्रम में शामिल होने के लिए उपयोगकर्ताओं को प्रोत्साहित करने के लिए सरकार द्वारा विभिन्न कदम उठाए जा रहे हैं।
प्रभावी पहचान: पहला कदम लाभार्थियों एवं स्वयंसेवी शिक्षकों की पहचान करना है। आधार के रूप में  विद्यालयों का उपयोग करके राज्यों/संघ शासित प्रदेशों द्वारा लाभार्थियों एवं स्वयंसेवी शिक्षकों (वॉलंटरी टीचर्स/वीटी) का सर्वेक्षण किया जा रहा है।
गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण: स्वयंसेवी शिक्षकों को ऑनलाइन मोड में शिक्षण मॉड्यूल को पूरा करने के लिए प्रशिक्षित किया जाता है। राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों द्वारा विभिन्न कार्यशालाओं का आयोजन किया जा रहा है।
गुणवत्तापूर्ण सामग्री: राष्ट्रीय स्तर पर, सामग्री राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (नेशनल काउंसिल ऑफ एजुकेशनल रिसर्च एंड ट्रेनिंग/NCERT) में राष्ट्रीय साक्षरता केंद्र (सेल फॉर नेशनल सेंटर फॉर लिटरेसीCNCL) के प्रकोष्ठ द्वारा संचालित होती है।
शिक्षण एवं अधिगम की सामग्री एनसीईआरटी द्वारा विकसित दीक्षा पोर्टल पर उपलब्ध है।
नमूना मूल्यांकन मॉड्यूल भी दीक्षा पर उपलब्ध कराया गया है।

FAQ

न्यू इंडिया लिटरेसी प्रोग्राम (एनआईएलपी) के संदर्भ में प्रायः पूछे जाने वाले प्रश्न

[NILP Survey Kaise Kare]

प्र. न्यू इंडिया लिटरेसी प्रोग्राम (एनआईएलपी) क्या है?

उत्तर. न्यू इंडिया लिटरेसी प्रोग्राम (NILP) एक केंद्र प्रायोजित योजना है जिसका उद्देश्य भारतीय लोगों के बीच 21वीं सदी की प्रासंगिक शिक्षा एवं कौशल को विकसित करना है।

प्र. न्यू इंडिया लिटरेसी प्रोग्राम (NILP) के उद्देश्य क्या हैं?

उत्तर. न्यू इंडिया लिटरेसी प्रोग्राम (एनआईएलपी) के निम्नलिखित पांच उद्देश्य हैं-

मूलभूत साक्षरता एवं संख्यात्मक ज्ञान,
महत्वपूर्ण जीवन कौशल,
व्यावसायिक कौशल विकास,
बुनियादी शिक्षा एवं
सतत शिक्षा।
प्र. एनएलआईपी योजना का कुल वित्तीय परिव्यय कितना है?

उत्तर. “न्यू इंडिया लिटरेसी प्रोग्राम” का अनुमानित कुल परिव्यय लगभग 1038 करोड़ रुपये है।

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विद्यालय विद्यालय और उच्च प्राथमिक विद्यालय/कम्पोजिट विद्यालयों में कम्पोजिट ग्रांट से क्रय की जाने वाली वस्तुओ की लिस्ट और स्वच्छता पर कितना खर्च करना है

 विषयः वर्ष 2022-23 में परिषदीय  विद्यालय और उच्च प्राथमिक विद्यालय/कम्पोजिट विद्यालयोंमें कम्पोजिट ग्रांट से क्रय की जाने वाली चीजो की लिस्ट 

समय शिक्षा की वार्षिक कार्ययोजना एवं बजट 2022-23 के सम्बन्ध में शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा प्रदेश के परिषदीय प्राथमिक/उच्च प्राथमिक एवं कम्पोजिट विद्यालयों को नामांकन के आधार पर 05 श्रेणी में वर्गीकृत करते हुये कम्पोजिट स्कूल ग्राष्ट की स्वीकृति प्रदान की गयी है। कम्पोजिट स्कूल ग्राण्ट हेतु स्वीकृत धनराशि जनपदवार अवमुक्त की जा रही है, 


उक्त धनराशि के उपयोग करने के सम्बन्ध में निम्नवत् निर्देश निर्गत किये जाते है

  •  कम्पोजिट स्कूल ग्राण्ट की धनराशि विद्यालय प्रबन्ध समिति के खातों में श्रेणी के अनुसार ही हस्तान्तरित की जायेगी, जिसका व्यवहरण अध्यक्ष एवं सदस्य सधिय (प्रधानाध्यापक) के संयुक्त हस्ताक्षर से किया जायेगा || इस सम्बन्ध में शासनादेश संख्या 2223/79-5-2012-29/99 टी०सी०-।। दिनांक 05 जुलाई, 2012 के अनुसार कार्यवाही सुनिश्चित की जायेगी। आवंटित | धनराशि का उपभोग निम्नलिखित दिशा-निर्देशों के अधीन विद्यालय प्रबन्ध समिति के अनुमोदनोपरान्त किया जायेगा
  • निपुण भारत के लोगो की पेन्टिंग कार्य हेतु विद्यालय भवन की ऐसी दीवार का चयन किया जाये, जो जनसामान्य हेतु प्रथम दृष्ट्या दृश्यमान हो। लोगो की पेन्टिंग की माप 45 से०मी० चौड़ा एवं BD से०मी० ऊँचे आयताकार आकार में होगी। लोगो की रंगीन, फोटो संलग्न है (संलग्नक-2). फोटो के अनुसार ही लोगों में रंगों का समावेश कियाजाये। इस प्रयोजन हेतु प्रत्येक विद्यालय में लोगों की उपलब्धता सुनिश्चित की जाये।
  • प्रत्येक विद्यालय में भवन की दीवार पर कम्पोजिट स्कूल ग्राष्ट के मद में उपलब्ध एवं व्यय होने वाली धनराशि का वर्षवार एवं मदवार विवरण पेन्ट कराया जायेगा।

अनुमन्य कार्य:- वरीयता क्रम में निम्नवत् कार्य अनुमन्य होंगे-

प्रथम वरीयता-स्वच्छता एवं हैण्डवाशिंग

  •  कम्पोजिट स्कूल, ग्राप्ट हेतु स्वीकृत धनराशि में से न्यूनतम 10 प्रतिशत धनराशि स्वच्छता अभियान/कार्यक्रम पर व्यय हेतु निर्धारित है, जो विद्यालय भदन, परिसर एवं छात्रों की स्वच्छता पर व्यय की जायेगी। यह भी सुनिश्चित किया जायेगा कि विद्यालय में स्वच्छता सामग्री यथा ट्वायलेट क्लीनर, फिनायल, साबुन, चूना डाइटिंग क्लॉथ गेल्टर हेण्डवॉश, सैनिटाइजर इत्यादि अनिवार्य रूप से वर्षपर्यन्त आवश्यकतानुसार उपलब्ध रहे
  • जिन विद्यालयों में छात्र-छात्राओं की संख्या के अनुरूप मल्टीपल हैण्डवॉशिंग सिस्टम की व्यवस्था किन्हीं कारणों से अभी तक नहीं हो सकी है अपना जहा मल्टीपल हैण्डवॉशिंग सिस्टम छात्र-छात्राओं की संख्या के अनुरूप टोटियाँ नहीं स्थापित हैं, वहां मल्टीपल हैण्डबॉशिंग सिस्टा की व्यवस्था / पर्याप्त टोटियों की व्यवस्था के लिये रनिंग वॉटर की सुविधा अनिवार्य को सुनिश्थिा शौचालय / मूत्रालय जो छोटी-छोटी टूट-फूट, leach-pit निर्मित न होने सुनिश्चित की जानी है। गरम्मत/ छोटे-छोटे कार्य यथा अथवा कम गहरा होने आदि के कारण की क्रियाशीलता विद्यालय के ऐसे यूरेनल पॉट में बक्रियाशील हैं, उनम उक्त कार्यों को कराकर उन्हें क्रियाशील कराया जायेगा। यदि शौचालय में टाइलीकरण का कार्य नहीं हुआ है, तो इसे अनिवार्य रूप से पूर्ण करा लिया जाये।

द्वितीय वरीयता - शुद्ध पेयजल

  • हैण्ड पम्प / सबमर्सिबल पम्प के पास का प्लेटफार्म एवं सोख्ता गड्ढा का निर्माण अनिवार्य रूप से कराया जायेगा, ताकि हैण्डपम्प के आस-पास जल भराद न हो सके तथा साफ-सफाई रहे।
  • रसोईघर में भोजन तैयार किये जाने एवं रसोईघर तथा बर्तनों की साफ-सफाई हेतु जल आपूर्ति एवं जल निकासी की समुचित व्यवस्था करायी जायेगी।

शिक्षण सहायक सामग्री


  • समस्त परिषदीय विद्यालयों के प्रत्येक कक्षा-कक्ष में मानकानुरूप एवं गुणवत्तायुक्त व्हाइट / ग्रीन बोर्ड की उपलब्धता अनिवार्य रूप से सुनिश्चित की जाये।
  • यथावश्यक शिक्षण सहायक सामग्री (अधिकतम रू० 2000/की सीमा तक) यथ प्रिन्ट रिच मैटीरियल, विज्ञान किट, गणित किमान पर इस धनराशि का उपयोग किया जा सकताहै। विद्यालय में नामांकित दिव्यांग छात्रों हेतु टी0एल0एन0 एवं दृष्टि दिव्यांग छात्रों हेतु एग्बोस्ड ग्लो तथा एम्बोल्ड मानांचे का आवश्यकतानुसार क्रय भी इसी धनराशि से किया जा सकता
  • जिन विद्यालयों में टी०एल०एम० के रख-रखाव हेतु अलमारी का क्रय अभी तक नहीं किया गया है, उनमें इस हेतु अलमारी क्रय की जायेगी।
  • फर्स्ट-एड-बॉक्स हेतु क्रय की गयी सामग्री/ दवाईयों की समाप्ति तिथि (expiry date) का अवश्य मिलान करा लिया जाये तथा expired दवायें नष्ट कर दी जायें एवं आवश्यकतानुसार सामग्री क्रय किया जायेगा।
  • विद्यालय में उपलब्ध अग्नि शमन यंत्र की समय से रिफिलिंग सुनिश्चित की जायेगी।
  • विद्यालय के अक्रियाशील विद्युत उपकरण यथा- एल0ई०डी०, ट्यूबलाइट, पंखे, स्विच आदि को ठीक करने अथवा उसके बदलने का कार्य कराया जायेगा !
  • उच्च प्राथमिक विद्यालयों के लिये इस अनुदान राशि से प्रयोगशालाओं और कम्प्यूटर शिक्षा दिषयक आवश्यक कन्ज्यूमेबल सामग्री तथा इण्टरनेट पर भी व्यय किया जा सकता है।
  • यदि विद्यालय की रंगाई-पुताई गत वर्ष में कम्पोजिट स्कूल ग्राण्ट से अथवा आपरेशन कायाकल्प के अन्तर्गत नहीं कराई गयी है तो विद्यालयों की रंगाई-पुताई, दरवाजे, खिड़कियों, ग्रिल, चहारदीवारी, गेट के पेन्ट एवं वॉल-पेन्टिंग का कार्य भी आवश्यकतानुसार कराया जायेगा। प्रदेश के समस्त परिषदीय विद्यालयों में एकरूपता लाये जाने के लिये आवश्यक है।कि भवन बाहर से अनिवार्य रूप से सफेद रंग में पुत वाया जायेगा।
  • कक्षा-1 के लिए विशेष पेन्टिंग की व्यवस्था यथा-वाल वाटिका का लोगो इत्यादि की पेन्टिंग करायी जायेगी।
  • विद्यालय में उपलब्ध मरम्मत योग्य सामग्री यथा-कुर्सी, नेज, झूला, हैण्डपम्प, ब्लैक बोर्ड, फर्शएवं दीवार के आंशिक प्लास्टर/पैट-वर्क एवं अन्य समस्त प्रकार की छोटी-मोटी मरम्मत एवंरख-रखाव, यथावश्यक दरवाजे हेतु ताले एवं इण्टरलॉकिंग इत्यादि कार्य कराया जायेगा।

  • जहाँ पर फर्नीचर की व्यवस्था न हो वहीं पर्याप्त संख्या में टाट-पट्टी, चटाइयाँ/दरी बच्चों के कक्षाकक्षा में बैठने हेतु) की व्यवस्था की जायेगी।
  • ऐसे परिषदीय विद्यालयों में, जहां 'स्मार्ट क्लास की स्वीकृति प्राप्त हुई है, उनमें सुरक्षतात्मक दृष्टिकोण से कम्पोजिट स्कूल ग्राण्ट के अन्तर्गत निम्नवत् कार्यवाही सुनिश्चित की जानी है:• विद्यालय के गेट और कक्षों के समस्त दरवाजों पर सामान्य ताला के स्थान पर डबल इंटरलॉकिंग की व्यवस्था की जायेगी. साथ ही जिस कक्षा-कक्ष में स्मार्ट क्लास के उपकरण हों, उसकी खिड़कियों पर लोहे की सुरक्षित ग्रिल व पर्याप्त मात्रा में सुरक्षित कुन्डी की व्यवस्था की जायेगी।
  •  जिस कक्ष में अवस्थापना सुविधा का अधिष्ठापन किया जाना है, वहाँ के दरवाजे लोहे के होंगें।


कक्षा-कक्षों का टाइलीकरण

ऐसे विद्यालय जिसमें सभी कक्षा-कक्ष की फर्श टूटी फूटी क्षतिग्रस्त है और वहाँ रू० 75000/- या उससे अधिक कम्पोजिट स्कूल ग्राण्ट की धनराशि प्राप्त हो रही है वहाँ, प्रथम वरीयता एवं द्वितीय वरीयता के कार्य एवं अन्य आवश्यक कार्यों यथा-सहायक शिक्षण सामग्री प्राथमिक उपचार सामग्री, अग्निशमक यंत्र की रीफिलिंग, यथावश्यक पेंटिंग कार्य, अक्रियाशील उपकरणों को ठीक कराना / बदलवाना आदि (जिससे संबंधी सुझावात्मक 05 सूचियाँ संलग्न है) (संलग्नक-3-7), कार्यों को कराने के बाद यदि पर्याप्त धनराशि अवशेष बचती है, तो उपलब्ध धनराशि के अनुरूप कक्षा-कक्षों के टाइलीकरण का कार्य विद्यालय प्रबन्ध समिति से अनुमोदनोपरान्त कराया जायेगा। इसके अतिरिक्त विद्यालय की आवश्यकतानुसार अन्य कार्य भी विद्यालय प्रबंध समिति से अनुमोदनोपरान्त कराये जा सकेंगें।

इसके अतिरिक्त विद्यालय की आवश्यकतानुसार अन्य कार्य भी विद्यालय प्रबंध समिति सेअनुमोदनोपरान्त कराये जा सकेंगे।

सामान्य निर्देश:


यदि गत वर्ष की कोई धनराशि शेष हो तो उसे वर्तमान वर्ष की धनराशि के साथ सम्मिलित कर संयुक्त कार्ययोजना बनाकर विद्यालय प्रबन्ध समिति के अनुमोदन से कार्य कराया जा सकेगा। विद्यालय की वास्तविक आवश्यकता के अनुसार ही वित्तीय नियमों का पालन करते हुए अच्छी गुणवत्ता की सामग्री क्रय की जानी है। यदि कोई कार्य अन्य योजना/नद के अन्तर्गत पूर्व में कराया जा चुका है अथवा अन्य योजनान्तर्गत कार्ययोजना में अनुमोदित है, तो पुनः कम्पोजिट स्कूल ग्राण्ट का उपयोग ऐसे कार्य के लिये न किया जाय जो सामग्री गत वर्ष पूर्व में क्रय की जा चुकी हो उसको क्रय सूची में अनावश्यक रूप से शामिल नहीं होना चाहिए। यह विशेष ध्यान रखा जाये कि एक ही कार्य के लिये दो मदों से धनराशि कदापि आहरित न हो इस प्रकार के तथ्य प्रकाश में आने पर इसे गबन की श्रेणी में मानते हुये कार्यवाही की जायेगी।

विद्यालय प्रबन्ध समितियों द्वारा स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप विभिन्न सामग्रियों की क्रयप्रक्रिया में निम्नलिखित निर्देशों का कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित किया जायेगा

  1. शासन द्वारा समय-समय पर निर्गत क्रय प्रक्रिया सम्बन्धी शासनादेशों, नियमावलियों एवंनिर्देशों का अनुपालन ।
  2.  स्टोर पर्चेज रूल्स में दिये गये आदेश एवं निर्देशों का अनुपालन

उक्त बिन्दु सं० 1 एवं 2 में दिये गये निर्देशों के अनुरूप नियमानुसार कोटेशन / निविदा प्रक्रियाका अनुपालन सुनिश्चित किया जायेगा।

कम्पोजिट स्कूल ग्राण्ट से क्रय की जाने वाली सामग्रियों की गुणवत्ता के सम्बन्ध में निम्नलिखित निर्देशों का अनुपालन अनिवार्यतः सुनिश्चित कराया जायेगा

1. सामग्री क्रय में निर्धारित मानक एवं स्पेसीफिकेशन का पालन किया जायेगा।

2. क्रय की जाने वाली सामग्री प्रमुखतया भारतीय मानक ब्यूरो(BS!) प्रमाणित हो तथायथासम्भव जी०एस०टी० पंजीकृत फर्म से ही क्रय करने की कार्यवाही की जायेगी।

3.जो सामग्री BSI द्वारा प्रमाणित न हो वह मूल निर्माता उत्पादक अथवा अधिकृत विक्रेता सेही क्रय की जायेगी।


कम्पोजिट स्कूल ग्राण्ट से क्रय की गयी सामग्री हेतु 02 प्रकार के स्टॉक रजिस्टर बनाये जायें,

1- उपभोज्य (consumable) सामग्री- जैसे फिनायल, साबुन, मिष्ठान, हेतु 

2-उपभोज्य न होनेवाली (non-consumable) सामग्री-जैसे- आलमारी, रजिस्टर, श्यामपट जैसी स्थायी प्रकृति कीसामग्री, की प्रविष्टि हेतु ।

 कम्पोजिट स्कूल ग्राण्ट में धनराशि का उपयोग के लिये सम्बन्धित विद्यालय के प्रधानाध्यापक पूर्णतः उत्तरदायी होंगे। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी का उत्तरदायित्व होगा कि इस निर्देश पत्र की प्रतियां यथावश्यक छपवाकर प्रत्येक विद्यालय के प्रधानाध्यापक /इचार्ज अध्यापक को खण्ड शिक्षा अधिकारी के माध्यम से वितरित कराया जाना सुनिश्चित करायें।


अनुश्रवण, पर्यवेक्षण एवं सत्यापन:

  • कम्पोजिट स्कूल ग्राण्ट मद में अवमुक्त धनराशि का निर्धारित प्रारूप पर उपभोग प्रमाण–पत्र प्रधानाचार्य एवं अध्यक्ष, विद्यालय प्रबन्ध समिति के संयुक्त हस्ताक्षर से प्राप्त कर ब्लॉक स्तर पर संरक्षित रखा जायेगा एवं प्रेरणा पोर्टल पर उपलब्ध कम्पोजिट स्कूल ग्राण्ट Data Capture Format (DCF) पर विद्यालयवार, मदवार त्रुटिरहित सूचना सम्बन्धित खण्ड शिक्षा अधिकारी द्वारा अपलोड की जायेगी
  • खण्ड शिक्षा अधिकारी अपने विकास खण्ड में रैण्डम आधार पर 20% विद्यालयों में सामग्री क्रय की प्रक्रिया, उसकी गुणवत्ता तथा अभिलेखों के रख-रखाव के सम्बन्ध में स्वयं जांच करेंगे और निर्देशों का अनुपालन सुनिश्चित कराते हुए आख्या जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी को भेजेंगे।
  • सहायक वित्त एवं लेखाधिकारी प्रत्येक माह कम से कम 05 शिक्षण दिवस में सम्बन्धित खण्ड शिक्षा अधिकारी के साथ अलग-अलग विकास खण्ड के अलग-अलग विद्यालयों का पर्यवेक्षण करेंगे तथा संयुक्त निरीक्षण आख्या के साथ वित्तीय व्यवहार में पायी गयी कमियों का उल्लेख करते हुए भविष्य में विद्यालय स्तर पर युक्तियुक्त वित्तीय व्यवहार करने की अनुशंसा को जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी के समक्ष प्रस्तुत करेंगे।
  • जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी का दायित्व होगा कि वे सहायक वित्त एवं लेखाधिकारी तथा खण्ड शिक्षा अधिकारी के ऐसे पर्यवेक्षण का अनुश्रवण करें तथा उनके द्वारा दिये गये यथेष्ट सुझावों को प्रत्येक विद्यालय स्तर तक अनुपालन हेतु प्रभावी कदम उठायें।
  •  विद्यालय निरीक्षण के दौरान जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी तथा मण्डलीय सहायक शिक्षा निदेशक(बेसिक) विद्यालय में कम्पोजिट स्कूल ग्राण्ट के उपभोग के सम्बन्ध में क्रय प्रणालीप्रक्रिया, सामग्री की गुणवत्ता तथा अभिलेखों के रख-रखाव व अनुदान के उपभोग में अनियमितता पाये जाने पर दोषी प्रधानाध्यापक / विद्यालय प्रबन्ध समिति के विरुद्ध कार्यवाही सुनिश्चित करेंगे।

उक्त के सम्बन्ध में क्रय की प्रक्रिया में पारदर्शिता सामग्री की गुणवत्ता तथा अभिलेखों का समुचित रख-रखाव सुनिश्चित करने हेतु जिलाधिकारी एवं अध्यक्ष, जिला शिक्षा परियोजना समिति स्वर से अनुमोदन प्राप्त कर जिला स्तर के अधिकारी अथवा तहसील ब्लॉक स्तर के अधिकारी की दो सदस्यीय समिति गठित कर ली जाये एवं रेण्डम आधार पर चिन्हित करते हुए प्रति विकास खण्ड 20-20 विद्यालयों की जांच करा ली जाये। सत्यापन टीम द्वारा कम्पोजिट स्कूल ग्राण्ट की धनराशि के उपभोग, विद्यालयों में कराये गये कार्यों एवं क्रय-प्रक्रिया, सामग्रियों की गुणवत्ता तथा अभिलेखों केरख-रखाव की जांच की जायेगी।


कम्पोजिट ग्रांट में ग्रांट के अनुसार क्रय की जाने वाली सामग्री :


कम्पोजिट ग्रांट के अंतर्गत ग्रांट के अनुसार चीजे खरीदी जाती है इनकी लिस्ट ग्रांट के अनुसार निम्न है 









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प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों का शैक्षिक सत्र 2022-23 हेतु अन्तःजनपदीय स्थानान्तरण / समायोजन


उ0प्र0 बेसिक शिक्षा परिषद के नियंत्रणाधीन संचालित प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों का शैक्षिक सत्र 2022-23 हेतु अन्तःजनपदीय स्थानान्तरण/ समायोजन के सम्बन्ध में।


उपर्युक्त विषयक अपने पत्रांक-महा०नि०स्कू०शि० / 1717 / 2022-23, दिनांक 25-6-2022 का कृपया संदर्भ ग्रहण करने का कष्ट करें, जिसके द्वारा उ०प्र० बेसिक शिक्षा परिषद नियंत्रणाधीन संचालित प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों का शैक्षिक सत्र 2022-23 हेतु अन्तःजनपदीय स्थानान्तरण / समायोजन के सम्बन्ध में प्रस्ताय उपलब्ध कराया गया। 2 इस सम्बन्ध में मुझे यह कहने का निर्देश हुआ है कि सम्यक विचारोपरान्त शैक्षिक सत्र | 2022-23 हेतु अन्तः जनपदीय स्थानान्तरण / समायोजन के सम्बन्ध में निम्नवत् नीति निर्धारित की जाती है



शैक्षिक सत्र 2022-23 के लिए अन्त जनपदीय स्थानान्तण एवं समायोजन प्रक्रिया

01 - अन्तः जनपदीय स्थानान्तरण/ समायोजत राष्ीय सूचना विज्ञान केन्द्र लखनऊ द्वारा विकसित साफ्टवेयर के माध्यम से ऑनलाइन की जायेगी।

02- अन्तः जनपदीय स्थानान्तरण समायोजन के लिए निम्नयत समिति जनपद स्तर पर गठित की जायेगी

1- जिलाधिकारी / जिला मजिस्टेट                           (अध्यक्ष )

2- मुख्य विकास अधिकारी                                    (उपाध्यक्ष )

3.प्राचार्य जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान               (सदस्य )

4. वित्त एवं  लेखाधिकारी (बेसिक शिक्षा )                 (सदस्य )

5- जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी                           (सदस्य सचिव )

03- स्थानान्तरण की कार्यवाही ग्रामीण पासवर्ग से ग्रामीण सेव संवर्ग एवं नगर सेवा संवर्ग से नगर सेवा संवर्ग में की जायेगी

04– निःशुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 के मान मानकों के आधार पर अधिक अध्यापक संख्या वाले विद्यालय (Surplus) एवं अध्यापक की आवश्यकता वाले विद्यालय (Deficit) मानव सम्पदा पोर्टल पर दिनांक 30 अप्रैल, 2022 को उपलब्ध छात्र संख्या के आधार पर चिन्हित किया जायेगा। अछाय की आवश्यले विद्यालय काचिन्हांकन शिक्षक विहिन, एकल ‘शक्षक एवं ऐसे विद्यालय जहाँ 02 से अधिक शिक्षण कार्यरत हैं. परन्तु निःशुल्क एवं अभिवार्य बाल शिक्षा अधिकार अधिनियम के गान मानको अनुसार रिक्तियां है।

05- निःशुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 के मान मानकों के आधार पर अधिक अध्यापक संख्या वाले विद्यालय (Surplus) में मानक से अधिक सहायक अध्यापक एवं प्रधानाध्यापक चिन्हित किये जायेंगे।

06- आवश्यकता से अधिक अध्यापक वाले विद्यालय (Surplus) में चिन्हित निःशुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम के मान मानक से अधिक सहायक अध्यापक एवं प्रधानाध्यापक को समकक्ष पद पर अध्यापक की आवश्यकता वाले विद्यालय (Deficit) में स्थानान्तरित एवं समायोजित किया जायेगा।

07- अन्तः जनपदीय स्थानान्तरण एवं समायोजन की प्रक्रिया अधिक अध्यापक वाले विद्यालय (Surplus) से अध्यापक की आवश्यकता वाले विद्यालय (Deficit) में किया जायेगा।

08- किसी भी आवश्यकता वाले विद्यालय से अध्यापक / अध्यापिका / प्रधानाध्यापक का स्थानान्तरण एवं समायोजन नही किया जायेगा।

09- आवश्यकता से अधिक अध्यापक वाले विद्यालय (Surplus) में मानक से अधिक अध्यापक, अध्यापिका एवं प्रधानाध्यापक एवं अध्यापक की आवश्यकता वाले विद्यालय (Deficit) चिन्हित कर निर्दिष्ट बेबसाइट पर प्रदर्शित किया जायेगा।

10- सर्वप्रथम आवश्यकता से अधिक अध्यापक वाले विद्यालय (Surplus) में चिन्हित अध्यापक / अध्यापिका / प्रधानाध्यापक स्वेच्छा से अध्यापक की आवश्यकता वाले 25 विद्यालयों (Deficit) का विकल्प लेते हुए अन्तः जनपदीय स्थानान्तरण किया जायेगा।

11- आवश्यकता वाले ऐसे विद्यालय जहाँ के लिए एक ही आवेदन पत्र प्राप्त हुआ है को आवेदन पत्र के आधार पर स्थानान्तरण की कार्यवाही की जायेगी

12- स्वेच्छा से आवश्यकता से अधिक अध्यापक वाले विद्यालय (Surplus) से आवश्यकता वाले विद्यालय (Deficit) के लिए एक से अधिक आवेदन प्राप्त होने की दशा में उनकी वरिष्ठता निम्न देय भारांक के अनुसार की जायेगी


                                             मानक                                                                                            अंक

1.            सेवा के प्रत्येक पूर्ण वर्ष के लिए 01                                                                                   10 

2.            असाध्य या गम्भीर रोग से ग्रसित(स्वय/पति या पत्नी / अविवाहित पुत्र/पुत्री)                           15 

3             .दिव्यांगअध्यापक / अध्यापिका पत्नी/ अविवाहित पुत्र/पुत्री)                                                10 

4.             शिक्षक/शिक्षिका जिनके पति या भारत सरकार/ भारतीय थल सेना / भारतीय नौ 

                सेवा केन्द्रीय अर्ध सैनिक बल एवं उत्तर प्रदेश सरकार उ0प्र0 बेसिक शिक्षा परिषद,

                 प्रयागराज के अधीन) में कार्यरत

5.             एकल अभिभावक (पुत्र/पु त्रियों का अकेले पालन करने                                                   10

                               वाले अध्यापक अध्यापिक)

6               .महिला अध्यापिका                                                                                                     10 

7.               राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त अध्यापक /अध्यापिका                                                                05 

8.              राज्य पुरस्कार प्राप्त अध्यापक/ अध्यापिका                                                                  03 


13. अध्यापक / अध्यापिका का भारांक समान होने पर नियुक्ति तिथि में वरिष्ठतम् तथा नियुक्ति तिथि में समानता होने पर अधिक  आयु वाले अध्यापक/अध्यापिकाओं को अन्तः जनपदीय स्थानान्तरण का लाभ दिया जायेगा।

14.  अंतः  जनपदीय समायोजन की प्रक्रिया

(1) चिन्हित आवश्यकता से अधिक अध्यापक वाले विद्यालय (Surples) में ऐसे अध्यापक/ अध्यापिका जिनका कार्यरत विद्यालय में पदस्थापन होने के कारण निःशुल्क और अनिवार्य ल शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2000 के मान / मानकों का विचलन हुआ है, को उनके विद्यालय में कार्यमाच ग्रहण करने की तिथि के अनुसार अवरोही क्रम में सूचीबद्ध कर निर्दिष्ट वेबसाइट पर प्रदर्शित किया जायेगा

(2)- सर्वप्रथम आवश्यकता से अधिक अध्यापक वाले विद्यालय (Surplus) जिनमें सबसे अधिक अध्यापक कार्यरत है से अतिरिक्त अध्यापकों को अध्यापक की आवश्यकता वाले विद्यालय (Deficit) में समायोजन की कार्यवाही की जायेगी। तत्पश्चात आवश्यकता से अधिक अध्यापक वाले विद्यालय (Surplus) में कार्यरत अध्यापकों की संख्या के अवरोही माप की आवश्यकता वाले विद्यालय में समायोजन की कार्यवाही की जायेगी

(3) आवश्यकता से अधिक अध्यापक वाले विद्यालय (Surplus) से अध्यापक की आवश्यकता वाले विद्यालय Deficit) में शिक्षक विहीन, एकल शिक्षक एवं ऐसे विद्यालय जहाँ पर दो या दो से अधिक कार्यरत है परन्तु निःशुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा अधिकार अधिनियम के मान मानकों के अनुसार रिक्ति है में समायोजन की कार्यवाही की जायेगी।

(4) शिक्षक विहीन, एफल शिक्षक एवं ऐसे विद्यालय जहाँ पर दो से अधिक शिक्षक कार्यरत है परन्तु निःशुल्क एवं अनिवार्य दाल धिकार अधिनियम के मान मानकों के अनुसार रिक्ति है को छात्र संख्या के आधार पर एवं छात्र संख्या समान होने पर विद्यालय को अंग्रेजी वर्णमाला के अनुसार अवरोही में किया जायेगा।

(5)– शिक्षक, विद्यीन विद्यालय में -अध्यापक एवं ऐसे विद्यालयों पर दो या अनिवार्य बाल शिक्षा अधिकार अधिनियम के तैनात किया जायेगा। दो अध्यापक, शिक्षक वाले विद्यालय में दो से अधिक शिक्षक कार्यरत है एवं मानकों के अनुसार रिक्ति है, में एक शिक्षक तैनात किया जायेंगा 

(6)-अध्यापक/अध्यापिका का समायोजन निःशुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 के मान मानकों के अनुसार अध्यापक की आवश्यकता वाले विद्यालय (Deficit) में अध्यापक / अध्यापिका के कार्यरत विकास उपलब्धयों के शिक्षक विहीन,एकल शिक्षक से अधिक कार्यरत निःशुल्ए वं ऐसे विद्यालय जहां पर एवं अनिवार्य बाल शिक्षा अधिकारी के मानकों के अनुसार रिवाया है में समायोजन की कार्यवाही की जायेगी खण्य में दो या दो शिक्षक कार्यरत है 

(7) अध्यापक / अध्यापिका के कार्यरत विकास खण्ड में रिक्ति उपलब्ध नहीं होने की दशा में ऐसे अध्यापक / अध्यापिका जिनका समायोजन अध्यापक की आवश्यकता वाले विद्यालय. (Deficit) में नहीं हो सका है को अन्य विकास खण्ड में रिक्ति की उपलब्धता की दशा में शिक्षक विहीन, एकल शिक्षक एवं ऐसे विद्यालय जहाँ पर दो या दो से अधिक शिक्षक कार्यरत है. परन्तु निःशुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा अधिकार अधिनियम के मानकों के अनुसार रिक्ति है में समायोजन की कार्यवाही की जायेगी।

( 8 ) – आवश्यकता से अधिक अध्यापक वाले विद्यालय (Surplus) में चिन्हित शिक्षक को उनकी वरिष्ठता के आधार पर अवरोही कम में सूचीबद्ध किया जायेगा तथा अध्यापक की आवश्यकता वाले विद्यालय (Deficit) को अवरोही क्रम में सूचीबद्ध किया जायेगा। आवश्यकता से अधिक अध्यापक वाले विद्यालय (Surplus) की सूची में वरिष्ठतम शिक्षक को अध्यापक की आवश्यकता वाले विद्यालय (Deficit) को सूची में शिक्षक विहीन, एकल शिक्षक एवं ऐसे विद्यालय जहाँ पर दो या दो से अधिक शिक्षक कार्यरत है, परन्तु निःशुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षाअधिकार अधिनियम के मान मानकों के अनुसार रिक्ति है, में समायोजित किया जायेगा।

(9)– आवश्यकता से अधिक अध्यापक वाले विद्यालय (Surplus) में चिन्हित अतिरिक्त  अध्यापक / अध्यापिका में दिव्यांग एवं असाध्य या गम्भीर रोग से ग्रसित अध्यापक/अध्यापिका (स्वयं) एवं एकल अभिभावक (पुत्र/पुत्रियों का अकेले पालन करने वाले अध्यापक/अध्यापिका) को छोड़ते हुए वरिष्ठता के आधार पर समायोजन की कार्यवाही की जायेगी।

(10)- अध्यापक / अध्यापिका जिनकी सेवावधि ऑनलाइन आवेदन करने की अन्तिम तिथि को 02 वर्ष से कम अवशेष होगी उन्हें भी समायोजन प्रक्रिया से पृथक रखा जायेगा। परन्तुऑनलाइन पोर्टल पर स्वेच्छा से उनके द्वारा ऑनलाइन आवेदन किया जा सकता है।

(11) अन्तः जनपदीय स्थानान्तरण/ समायोजन प्रक्रिया के सम्बन्ध में 10 कार्य दिवस में एन०आई०सी० के माध्यम से पोर्टल खोला जायेगा।


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10 नैनीताल दर्शनीय स्थल जिनका दीदार किए बिना आपकी यात्रा अधूरी है! नैनीताल में 11 सुन्दर घूमने की जगह | Nainital Tourist Places in Hindi : नैनीताल में घूमने की जगह और पर्यटन स्थल की जानकारी – Nainital Tourist Guide In Hindi

 उत्तराखण्ड राज्य के कुमाऊँ क्षेत्र का मुख्य पर्यटन स्थल नैनीताल को झीलों का शहर कहा जाता है। कल्पना कीजिए एक ऐसी जगह की जो पहाड़ों पर स्थित हो और हर तरफ से झीलों से घिरी हो। बर्फ से ढके पहाड़ जो आपको प्राकृतिक सौंदर्य में सराबोर कर देंगे। नैनीताल दर्शनीय स्थल आपको एक ऐसे माहौल के दर्शन कराऐंगे जो आपको मंत्र मुग्ध कर देंगे, जैसे आप एक अनोखे स्थान के निवासी हों। इतना खूबसूरत नज़ारा शायद ही आपको कहीं देखने को मिले।

10 नैनीताल दर्शनीय स्थल

झीलों से गिरता पारदर्शी जल आपकी आँखों को सुकून देगा। ताज़ी सरसराती हवा जब आपके चहरे को छूकर गुज़रेगी तब आप मन को लुभा लेने वाली ताज़गी का एहसास कर पाऐंगे। आइए चलते है नैनीताल भ्रमण पर जहाँ आपको केवल आनंद और उत्साह मिलेगा वो भी खूब सारी मात्रा में:

1. इको केव गार्डन

झूलते बगीचों एवं संगीतमय फव्वारों के लिए प्रसिद्ध यह गुफा 6 छोटी गुफाओं का मिश्रण है जिन्हें जानवरों के आकार में बनाया गया है। मुख्यतः ये नैनीताल दर्शनीय स्थल इसलिए बनाया गया है ताकि पर्यटकों को हिमालयी वन्यजीवों के प्राकृतिक वास की झलक से परिचय करवाया जाए। आपको अंदर जाने में थोड़ी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है पर पेट्रोल से जलते लैंप आपको आकर्षित करेंगे। यहाँ की प्रचलित गुफाएँ हैं- टाईगर केव, पैंथर केव, ऐप्स केव, बैट केव और फ्लाईंग फॉक्स केव।



2. नैनी झील


सात अलग-अलग पर्वत की चोटियों से घिरी यह झील कुमाऊँ क्षेत्र की सबसे प्रसिद्ध झील है। अपने खूबसूरत नज़ारों के लिए मशहूर यह नैनीताल दर्शनीय स्थल लोगों के बीच पिकनिक का बहुत प्रचलित स्थान है जहाँ बैठकर आप ढलते सूरज की विलुप्त होती लालिमा को देख पाऐंगे। शाम के वक्त आप ऐसे सौंदर्य पूर्ण वातावरण का गमन भी कर सकते है जहाँ आप झील में विचरण करते बत्तखों को भी देख पाऐंगे। आप झील के पास स्थित नैना देवी मंदिर के दर्शन करके मन को और अधिक शांति भी प्रदान कर सकते हैं।



3. मॉल रोड़

नैनी झील के सहारे बनी यह सड़क मल्लीताल व तल्लीताल को जोड़ती है। यहाँ आपको हर वक्त चहल-पहल का माहौल देखने को मिलेगा। उत्तराखण्डी संस्कृति व पारंपरिक स्वादिष्ट खाने का मिश्रण आपको यहाँ देखने को मिलेगा। खरीदारी के लिए भी यह उपयुक्त स्थान है जहाँ आपको सुंदर गर्म कपड़े आसानी से मिल जाऐंगे। तो फिर देर किस बात की है, आइए और नैनीताल को अपनी सेवा का अवसर दे दीजिए। नैनीताल के दर्शनीय स्थल में अगर आपने इस जगह को छोड़ दिया तो आप ज़रूर पछताऐंगे।

4.स्नो व्यू पॉइन्ट



दूध जैसी बर्फ से ढका हिमालय मन को लुभा लेनेवाला दृश्य आपकी आँखों के सामने ला देगा। इस नैनीताल दर्शनीय स्थल को देखकर आपका मन यकीनन नहीं भर पाएगा इसलिए इस मौका पर आप नैनीताल की फोटो लेना भूल ही नहीं सकते। समुद्र तल से 2270 मीटर ऊँचा यह बिंदु यात्रियों के बीच बेहद लोकप्रिय स्थान है। आपको ऐसा प्रतीत होने लगेगा कि हाथ ऊपर उठाते ही आपकी मुट्ठी में बादल कैद हो गए हों। आपके सामने होंगे ऊँचे बर्फीले पहाड़ और ऊपर होगी बादलों की सफ़ेद चादर, सोचकर ही मन गदगद हो रहा है।




5. टीफिन टॉप

नैनीताल के पर्यटन स्थल में शुमर यह जगह आपको पूरे नैनीताल का दृश्य दिखाएगी। चारों तरफ चीड़, ओक व देवदार से घिरा यह स्थल आपको खुशनुमा व शांति के वातावरण से रूबरू करवाएगा। अगर आप प्रकृति प्रेमी हैं तो आपको यहाँ भरपूर तसल्ली मिलेगी। तसल्ली भी ऐसी-वैसी नहीं, मन को आनंदमयी करने वाली। तो कोई क्यों यहाँ आना भूल सकता है और वैसे भी अगर आप यहाँ नहीं आए तो आपकी यात्रा अधूरी रह जाएगी। यह भी एक पिकनिक स्थल है और यहाँ कुछ रोमांचक कार्य भी किए जाते हैं जैसै पर्वतारोहण आदि तो आप इसे भूल तो सकते ही नहीं हैं।


6.नैना पीक

2615 मीटर की ऊँचाई के साथ यह नैनीताल की सबसे ऊँची चोटी है जो,सैलानियों के बीच आकर्षण का केंद्र है। साल भर बर्फ की चादर से ढके रहने वाले पहाड़ों को हरियाली युक्त पेड़ों ने घेरा हुआ है। तस्वीरें खींचने के शौकीन रखने वाले लोग यहाँ आकर अपनी इस इच्छा को पूरा कर सकते है। हाईकरों और ट्रैकरों के बीच यह स्थान बहुत प्रसिद्ध है। आप यहाँ अपने मित्रों के साथ या अपने साथी के साथ एक अच्छी छुट्टियाँ मना सकते है। सूर्योदय व सूर्यास्त के खूबसूरत नज़ारें देखने के लिए लोग यहाँ अकसर आते हैं।

7. पं.बल्लभ पंत ज़ू

विभिन्न प्रकार के पशुओं से लिप्त यह स्थान बहुत से जानवरों का निवास स्थान है जैसे-तेंदुआ, पहाड़ी लोमड़ी, भेड़िए, हिरन, हिमालयी काला भालू, सफ़ेद मोर और आदि। बहुत से विलुप्त होते पक्षियों को भी आप यहाँ से वहाँ पंख पसारते नज़र आऐंगे। 2100 मीटर की दूरी में फैला यह स्थान लंबे-लंबे घने पेड़ पशु-पक्षियों को रहने में सहायता करते हैं।



8. नयना देवी मंदिर

कहा जाता है कि इस जगह देवी सती के नेत्र गिरे थे इसलिए इस मंदिर का नाम नैना देवी रखा गया। हिंदुओं के प्रमुख तीर्थस्थलों में इसे भी शामिल किया गया है। यहाँ मौजूद पीपल का पेड़ शताब्दियों से लगा हुआ है जो लोगों में आकर्षण का केंद्र है। आप यहाँ आकर भक्ति में लीन हो सकते हैं। पहले मंदिर तक पहुँचने के लिए पैदल यात्रा करनी पड़ती थी पर अब यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए उड़नखटोलों की व्यवस्था की गई है ताकि श्रद्धालुओं को मुश्किल का सामना न






9.ज्योलिकोट

नैनी झील का प्रवेश द्वार कहा जाने वाला यह स्थान मनमोहने वाला नैनीताल दर्शनीय स्थल है। तरोताजा़ फल-फूलों व कई प्रकार की तितलियाँ का निवास स्थान यही है। प्रकृति से प्रेम करने वालों का यहाँ स्वागत है। आप यहाँ आकर रंग-बिरंगी तितलियों की तस्वीरें अपने कैमरे में कैद कर सकते है। बच्चे भी यहाँ आकर खूब लुत्फ़ उठा पाऐंगे और अपने छोटे से अवकाश को यादगार बना पाऐंगे। इन तितलियों की तरह आपका मन भी बेफिक्र होकर झूम उठेगा और आपके मन में खुशी की तरंगें चलने लगेगी।


10. जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क


हरियाली, शांत वातावरण, पेड़ों से गुज़रती ताज़ी हवा और उनके बीच विलुप्त होते पशु-पक्षी, इन सभी का संगम आपको एक ही स्थान पर और एक ही समय पर मिलेगा। हैरान होने वाली बात बिल्कुल नहीं है क्योंकि यहाँ जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क की बात हो रही है। अगर आप अक्टूबर से फरवरी के दौरान यहाँ आते हैं तो आपको यहाँ कुछ अनदेखे पक्षी देखने को मिलेंगे जो आप यहाँ के अलावा और कहीं नहीं देख पाऐंगे। यह सुनहरा अवसर है इसे आसानी से हाथ से जाने मत दीजिए।



नैनीताल के पर्यटक स्थल आपको ऊँची पहाड़ियों जितना ऊँचा उठा देंगे, जहाँ आप अपने सपने को सच करते हुए उड़ान भर सकते है। चमकता हुआ साफ पानी जिसमें आप सूर्य की परछाई एकदम साफ देख पाऐंगे। यहाँ आपको नम्र स्वभाव वाले पहाड़ी लोग मिलेंगे जिनकी वाणी की मिठास आपको पल भर में अपना बना लेगी। यहाँ का प्राकृतिक वातावरण तो अच्छा है ही, सांस्कृतिक और सामाजिक वातावरण में भी कोई कमी नहीं है। आप यहाँ बेहद आरामदायक तरीके से अपनी छुट्टियाँ बिता सकते हैं फिर चाहे अपने परिवार के साथ आएं या फिर मित्रों के साथ। नैनीताल को अपनी खातिरदारी करने का एक मौका दीजिए,आपको यकीनन खुशी का अनुभव होगा।


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प्रारंभिक व शुरुआती गणितीय गतिविधियां व ECCE के अंतर्गत आने वाली गतिविधियाँ

प्रारंभिक व शुरुआती गणिती गतिविधियां


गिनती

गिनती वस्तुओं की वास्तविक संख्या का पता लगाने के लिए है,जैसे-कितनी पेसिल हैं, कितनी रबर हैं, कितने लड़के हैं,
कितनी लड़कियाँ हैं, आदि। गिनती का अर्थ संख्याओं को क्रमबद्ध करना भी है- 1 के बाद 2 है. और 2 के बाद 3 है,
आदि। छोटे बच्चे अक्सर गिनती करते हुए संख्या छोड़ देते हैं या क्रम बदल देते हैं। उन्हें क्रम अनुसार वस्तुओं की गिनती
करने के लिए पर्याप्त मौके दिए जाने चाहिए। जब कोई बच्चा गिनती करना सीखता है, तो वह मात्रा, नाम और प्रतीक
के बीच संबंध बनाता है और वह संबंध मात्रा को अभिव्यक्त करता है। क्रम अनुसार संख्या का नाम जानने में भी गिनती
उन्हें मदद करती है। हाथ और पैर की उंगली का खेल संख्याओं के अनुक्रम को याद रखने की क्षमता को सुदृढ़ करता
है। बटन, कंकड़, मोती, पत्तियों जैसी ठोस वस्तुओं को एक सतह पर रखकर उनके नामों के साथ गिनती करते हुए बच्चों
को दिखाया जा सकता है। गिनती से संबंधित किसी कविता को भी हाव-भाव के साथ बच्चों को सिखाया जा सकता है
जिसमें बच्चे काफी आनंद लेते हैं।
...

आकृति/ पैटर्न बनाना


पैटर्न बनाना एक महत्वपूर्ण गतिविधि है। तार्किक
तरीके से कुछ चीजों का दोहराव ही पैटर्न है।
पैटर्न को पहचान कर बच्चे अनुमान लगा सकते
हैं- इसके बाद क्या आएगा? बच्चे समानता या
अंतर को देखकर पैटर्न का पता लगते हैं। पैटर्न
बनाना एक महत्वपूर्ण प्रारम्भिक गणितीय कौशल
है। बच्चे किसी भी वस्तु के साथ आकृति/पैटर्न
को बना सकते हैं जैसे- मोती, पत्थर, कंचे, पत्तियाँ,
फूल, लकड़ियाँ आदि। शरीर की गति (बॉडी मूवमेंट)
के साथ भी पैटर्न बनाया जा सकता है जैसेचुटकी-ताली आदि।


माप की अवधारणा


बच्चों में विभिन्न आकार व वजन आदि की तुलना करके माप की अवधारणा विकसित होती है, जैसे-कौन सी गुड़िया बड़ी
है, कौन सी लम्बी है, कौन से ब्लॉक (लकड़ी के गुटके) भारी हैं, आदि। जब वह एक बार यह सीख जाते हैं कि गिनती
कैसे करनी है, उसके बाद उन्हें गैर-मानक माप हेतु उपकरण जैसे हाथ, अंगुलियाँ, कोहनी, पैर, पेंसिल, छड़ी, आदि का
उपयोग करते हुए वस्तुओं को मापने के लिए प्रोत्साहित किया जा सकता है।
पूरा और आधा की अवधारणा (पज़ल/पहेली)
पहेलियाँ यह दर्शाती हैं कि कैसे एक पूरी वस्तु को विभिन्न भागों में विभाजित किया जा सकता है, और जब इन भागों
को एक साथ रखा जाता है, तो हमें पूरी वस्तु मिल जाती है। उदाहरण के लिए- किसी नाव की तस्वीर को 4 भागों में
काट दिया जाता है, या फूलों को भी विभिन्न भागों में काटा जा सकता है। इस अवधारणा को एक अन्य तरीके से बताने
के लिए कहानी सुनाई जा सकती है, जैसे- मेरे पास एक लड्डू है, और मैं इसे 4 बच्चों को देना चाहती हूँ। इसलिए मैं
इस लड्डू को 4 भागों में तोड़ती हूँ।

आंकड़ों का रख-रखाव



एक दिलचस्प गतिविधि के माध्यम से बच्चों को आंकड़ों का रख रखाव सिखाया जा सकता है। शिक्षक बच्चों से उनके
पसंदीदा फल के बारे में पूछे। जितने बच्चे आम कहते हैं उनको एक पंक्ति में रखें। वहीं जो बच्चे अमरुद कहते हैं उनको
अगली पंक्ति में और जो बच्चे केला कहते हैं उनको एक और अलग पंक्ति में रखें। इसके उपरान्त शिक्षक बोर्ड पर एक
शाफ खींच सकते हैं और कह सकते हैं- “देखिए हमने आपके पसंदीदा फलों के साथ एक ग्राफ बनाया है।
4
.
कोड नं0-90 राजीन प्रकाशन, प्रयागराज, वर्ष 2021-22 हेस,
वैज्ञानिक चिंतन व जिज्ञासा विकसित करने हेतु गतिविधियाँ
सरल गतिविधियाँ और प्रयोग, जो बच्चों को
विभिन्न वस्तुओं के विभिन्न गुणों को सीखने
में मदद करते हैं, उन्हें आसानी से आस-पास
उपलब्ध संसाधनों के साथ कक्ष में व्यवस्थित
किया जा सकता है। ये गतिविधियाँ इस प्रकार
से हो सकती हैं:
" डूबना और तैरना
" पत्तियों का वर्गीकरण
पानी में क्या घुलता है / क्या नहीं घुलता
है
पानी में रंग मिलाना
» गर्म होने वाले धातु और अधातु
" चुम्बक ( मैग्नेट) के साथ गतिविधियाँ

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SHARDA का फुल फॉर्म व उसका मतलब क्या है आउट ऑफ बच्चो से क्या तात्पर्य है

SHARDA का फुल फॉर्म व उसका मतलब क्या है आउट ऑफ बच्चो से क्या तात्पर्य है 


निःशुल्क और अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम-2009 के अन्तर्गत 06-14 आयु वर्ग के समस्त
बालक-बालिकाओं को निःशल्क प्रारम्भिक शिक्षा उपलब्ध कराये जाने का प्रावधान है। अधिनियम के अन्तर्गत यह भी
अपेक्षा की गयी है कि 06-14 आयु वर्ग के ऐसे बच्चे जिन्हें किसी विद्यालय में नामांकित नहीं किया गया है अथवा
नामांकन के उपरान्त वे अपनी प्रारम्भिक शिक्षा पूर्ण नहीं कर सके हैं उनका चिह्नीकरण करते हुए उनका नामांकन
आयुसंगत कक्षा में कराया जाये और अन्य विद्यार्थियों के समकक्ष लाने हेतु उन बच्चों को विशेष प्रशिक्षण देने की
व्यवस्था की जाये। अधिनियम के उक्त प्रावधान को प्रभावी रूप में क्रियान्वित करने हेतु समय-समय पर शासनदेशों के
माध्यम से जिलाधिकारी के निर्देशन में कार्यक्रम 'शारदा' (SHARDA-स्कूल हर दिन आयें) संचालित किए जाने के
निर्देश दिए गए हैं।
शैक्षिक सत्र 2021-22 में कार्यक्रम 'शारदा' के संचालन के बन्ध में निर्देश निम्नलिखित हैं.


 लक्षित समूह 

SHARDA FULL FORM= SCHOOL HAR DIN AAYE 

'शारदा' (SHARDA स्कूल हर दिन आयें) के अन्तर्गत जनपद में 5' से 14 आयुवर्ग के समस्त आउट ऑफ स्कूल
बच्चे लक्षित समूह हैं। आउट ऑफ स्कूल बच्चे 02 श्रेणी के हो सकते हैं:

1.ऐसे बच्चे जिनका विद्यालय में कभी भी नामांकन नहीं किया गया हो।
2. ऐसे बच्चे जिनका विद्यालय में पूर्व में नामांकन हुआ था किन्तु किन्हीं कारणवश अपनी शिक्षा पूरी किये
बिना विद्यालय छोड़ गये अर्थात ड्राप आउट हो गये।
ड्राप आउट बच्चों के चिन्हीकरण की प्रक्रिया को सुस्पष्ट करने के उद्देश्य से राज्य सरकार द्वारा आउट ऑफ स्कूल बच्चों
का निम्नवत परिभाषित किया गया है:- "06 से 14 वर्ष की आयु का कोई बालक बिना विद्यालय का माना जायेगा. यदि
वह किसी प्राणम्भक विद्यालय में कभी नामांकित न किया गया हो/की गयी हो अथवा यदि नामांकन के पात्
अनुपस्थित होने के कारणों की पूर्व सूचना के बिना विद्यालय से निरन्तर 45 दिन या उससे अधिक अवधि में अनुपस्थित रही हो


अभिभावकों को प्रेरित करने हेतु संवेदीकरण (Triggering )



आउट ऑफ़ स्कूल बच्चों के चिह्नांकन हेतु एस.एम्.सी. सदस्यों एवं अध्यापकों द्वारा मोहल्ला बैठकों का आयोजन
किया जायेगा। जिनमें नेहरू युवा केंद्र/एन.एस.एस./स्काउट गाइड के कार्यकर्ताओं का भी यथासंभव सहयोग लिया
जायेगा। मोहल्ला बैठकों में निम्न बिन्दुओं पर शिक्षा के महत्व के संबंध में चर्चा की जायेगी तथा समुदाय को प्रेरित
किया जाएगा
  1.  सभी बच्चों को स्कूल में पढ़ाना क्यों जरूरी है?
  2. सभी बच्चों को रोज स्कूल भेजना क्यों जरूरी है?
  3. बच्चों के स्कूल न जाने से क्या-क्या नुकसान है?
  4. क्या स्कूल में जो सिखाया जाता है, वह बाहर भी सीख सकते है?
  5. क्या बिना पढ़े-लिखे कोई अच्छा इन्सान/ अधिकारी बन सकता है?
  6. पढ़े-लिखे बच्चे और बिना पढ़े-लिखे बच्चे में क्या-क्या अंतर होता है?


क्या आपको पता है, 5' से 14 वर्ष का बच्चा पढ़ाई बीच में छोड़ चुका है तो क्या वह फिर से स्कूल में पढ़ने जा
सकता है?
आपके मोहल्ले से कितने बच्चे स्कूल में पढ़ने जाते है?
आपके मोहल्ले से 5 से 14 वर्ष के कितने बच्चे स्कूल में पढ़ने नहीं जाते है ?

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घर कितने प्रकार के होते है | मिट्टी के घर, तैरते हुए घर , पत्थर के घर

आपने अपने आस-पास तरह-तरह के घर देखे होंगे। इनमें से कुछ घर कच्चे होते हैं तो
कुछ घर पक्के। कुछ एक मंजिला या दो मंजिला होते हैं तो कहीं-कहीं बहुमंजिला इमारत दिखाई
देती हैं। इन भिन्नताओं के अलावा और भी कई तरह के घर बनाए जाते हैं। क्षेत्र विशेष की
जलवायु / मौसम के आधार पर भी घर के स्वरूप या बनावट में अन्तर दिखाई पड़ता है।

अलग-अलग क्षेत्रों में घर बनाने में प्रयुक्त होने वाली सामग्री भी अलग-अलग होती है।
बाँस का घरइस तरह के घर उन स्थानों पर बनाए जाते हैं
 जहाँ
बहुत अधिक बारिश होती है। ऐसे स्थानों पर घर जमीन से
10-12 फीट की ऊँचाई पर बाँस के मजबूत खम्भों पर बनाए
जाते हैं। बाँस अधिक समय तक पानी में रहने पर भी नहीं 
सड़ता हैं। ये घर अन्दर से भी लकड़ी के बने होते हैं।

बर्फ के घरऐसी जगह जहाँ चारों ओर केवल बर्फ ही बर्फ होती है, वहाँ
लोग बर्फ की सिल्लियों के घर बनाते हैं। ऐसे घर को 'इग्लू' कहते हैं।
ऐसे घर की दीवारें अंदर से छूने पर ठंडी तो लगती हैं, पर वे बाहर
गिरती बर्फ और ठंडी हवा को अन्दर नहीं आने देती। इसके अंदर
आग जलाई जाती है जिससे घर गर्म रहता है।



आपने अपने आस-पास तरह-तरह के घर देखे होंगे। इनमें से कुछ घर कच्चे होते हैं तो
कुछ घर पक्के। कुछ एक मंजिला या दो मंजिला होते हैं तो कहीं-कहीं बहुमंजिला इमारत दिखाई
देती हैं। इन भिन्नताओं के अलावा और भी कई तरह के घर बनाए जाते हैं। क्षेत्र विशेष की
जलवायु / मौसम के आधार पर भी घर के स्वरूप या बनावट में अन्तर दिखाई पड़ता है।
अलग-अलग क्षेत्रों में घर बनाने में प्रयुक्त होने वाली सामग्री भी अलग-अलग होती है।

बाँस का घरइस तरह के घर उन स्थानों पर बनाए जाते हैं जहाँ
बहुत अधिक बारिश होती है। ऐसे स्थानों पर घर जमीन से
10-12 फीट की ऊँचाई पर बाँस के मजबूत खम्भों पर बनाए
जाते हैं। बाँस अधिक समय तक पानी में रहने पर भी नहीं
सड़ता हैं। ये घर अन्दर से भी लकड़ी के बने होते हैं।

बर्फ के घरऐसी जगह जहाँ चारों ओर केवल बर्फ ही बर्फ होती है, वहाँ
लोग बर्फ की सिल्लियों के घर बनाते हैं। ऐसे घर को 'इग्लू' कहते हैं।

ऐसे घर की दीवारें अंदर से छूने पर ठंडी तो लगती हैं, पर वे बाहर
गिरती बर्फ और ठंडी हवा को अन्दर नहीं आने देती। इसके अंदर
आग जलाई जाती है जिससे घर गर्म रहता है।



मिट्टी के घर



ऐसे स्थान जहाँ बारिश बहुत कम होती है तथा अत्यधिक
गर्मी पड़ती है, वहाँ लोग मिट्टी के घर बनाकर रहते हैं। घर की
दीवारें बहुत मोटी होती हैं। मिट्टी सूर्य की गर्मी से सूखकर कठोर
हो जाती है। मोटी दीवारों के कारण गर्मी घर के अंदर नहीं आ
पाती है।

तैरते हुए घर



इस प्रकार के घर लकड़ी के डोंगे की भाँति बने होते
हैं। ये नावों की तरह पानी में तैरते रहते हैं। इसलिए इसे तैरते
हुए घर या हाउसबोट भी कहते है।


इसे भी जानें -
चीन में बहुत से लोग नाव पर बने घरों में रहते, खाते-पीते और सोते हैं। यह अपने लिए
इसी पर सब्जियाँ उगाते हैं और मुर्गियाँ भी पालते हैं। इन घरों को 'सामपान' कहते हैं।


पत्थर के घर



ऐसे घर पर्वतीय क्षेत्रों में दिखते हैं। इस प्रकार के घर
पत्थरों को काटकर उन्हें एक के ऊपर एक रखकर बनाए
जाते हैं। पत्थरों के ऊपर मिट्टी और चूने की पुताई की
जाती है। पर्वतीय क्षेत्रों में बारिश बहुत अधिक होती है तथा
बर्फ भी गिरती है। अतः ऐसी जगह पर घरों की छत सपाट
नहीं बनाई जाती है। इन घरों की छत ढलवा होती है।


घुमन्तू लोगों के घर



ऐसे लोग जो हमेशा एक जगह पर स्थायी रूप से नहीं
रहते हैं, वे इस प्रकार के घर में रहते हैं। इन्हें जहाँ ठहरना
होता है, वहाँ ये अपना घर अस्थायी रूप से टेन्ट आदि की।
मदद से बना लेते हैं। कभी-कभी लोग आवश्यकतानुसार भी
इस तरह के घर बनाकर रहते हैं। जैसे बाढ़ या भूकम्प वाले
क्षेत्रों में लोग प्रायः इस तरह के घर बनाकर रहते हैं।






मासिक समीक्षा बैठक का DCF और FEEDBACK फॉर्म लिंक :: KPI कैसे पूरा करे

 मासिक समीक्षा बैठक का DCF और FEEDBACK फॉर्म लिंक :: KPI कैसे पूरा करे 



मासिक बैठक के पहलू :

1.उपस्थित व्  उद्देश्य -

सभी टीचर्स की उपस्थित अनिवार्य है और सभी टीचर्स अपने स्कूल में कराये जाने वाली एक्टिविटी से सम्बंधित TLM या अन्य  सामग्री  का प्रदर्शन करेंगे जिससे सभी आये हुए शिक्षक उस चीज का अवलोकन करे और वापस जाकर सभी लोग अपने अपने विद्यालय में उस एक्टिविटी को  लागू करे 


2. 2 WAY कम्युनिकेशन  -

मिशन प्रेरणा के अंतर्गत सभी  टीचर्स अपने अपने मन की बात इस मीटिंग में रख सकते है .. एक पक्षीय नही बल्कि दो  पक्षीय वार्तालाप होंगी जहा सभी टीचर्स स्वतंत्र रूप से अपने पक्ष रख सकते है अपनी अपनी राय दे सकते है 

3. App इंस्टालेशन -

मिशन प्रेरणा के अंतर्गत सभी  टीचर्स अपने अपने मोबाइल में कुछ एप जो की मिशन प्रेरणा के  पूरक एप है वो होने ही चाहिए 
जैसे 

4.  हस्त्पुस्तिकाओ का प्रयोग-

मिशन प्रेरणा के अंतर्गत सभी  टीचर्स अपने अपने स्कूल में इस पुस्तिअको के अंतर्गत की पठन का कार्य करवाएंगे  और इन तीनो पुस्तिकाओ की मदद से  आप अपने स्कूल में बहुत सारी एक्टिविटी भी करवा सकते है 
ये तीनो पुस्तिकाए स्कूल में एक स्तम्भ की बहती कार्य करती है 
1 . आधारशिला 
2.शिक्षण संग्रह 
3. ध्यानाकर्षण 

5 .  शिक्षक डायरी -

मिशन प्रेरणा के अंतर्गत सभी  टीचर्स अपनी अपनी डायरी प्रतिदिन भरकर आएंगे और उसी के अनुसार क्लास का सञ्चालन होंगा पुरे दिन आपको उसी के अनुसार क्लास टीचिंग करनी होंगी यदि बने हुवा पालन पूरा नही हो पता है उस दिन वो प्लान नेक्स्ट डे के लिए शिफ्ट हो जायेंगा फिरSAME  वर्क आपको दुसरे दिन करवाना होना 

उसके बाद में सभी लोग  अपने डायरी  लिखेंगे की सभी कार्य संपदित हुए |

शिक्षक डायरी कैसे भरे :: https://youtu.be/2GIS2kvNPxE

6 .  मैथ्स किट का प्रयोग -

मिशन प्रेरणा के अंतर्गत सभी  टीचर्स  मैथ्स किट का प्रयोग जरुर करेंगे . मैथ किट में ग्यारह प्रकार की सामग्री दी हुई है 

ये सामग्री भुत ही USEFUL है आप सभी लोगो का मैथ किट का प्रयोग हर हॉल में करना ही है 


7.  साप्ताहिक क्विज करवाना -

मिशन प्रेरणा के अंतर्गत सभी  टीचर्स   को अपने अपने स्कूल में क्विज हर सप्ताह में शनिवार  को करवाना ही है  क्विज में यदि सभी बच्चे एक साथ सभी का नही हो पता है आप उनको सोमवार से लेकर शुक्रवार तक भी करवा सकते है अपने अनुसार |
हर रोज कुछ बच्चो का धीरे धीरे करके अगले शनिवार तक करवा सकते है 



8. DCF FORM व्  FEEDBACK FORM भरवाना -


मिशन प्रेरणा के अंतर्गत सभी  टीचर्स , मासिक समीक्षा बैठक में फीडबैक फॉर्म जरुर भरे जिसका लिंक मई नीचे दे दूंगा और DCF सभी संकुल टीचर को  भरना है ये दोनों काम हर बैठक में अनिवार्य रूप से होंगे 

फीडबैक फॉर्म लिंक : FEEDBACK FORM

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