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10 नैनीताल दर्शनीय स्थल जिनका दीदार किए बिना आपकी यात्रा अधूरी है! नैनीताल में 11 सुन्दर घूमने की जगह | Nainital Tourist Places in Hindi : नैनीताल में घूमने की जगह और पर्यटन स्थल की जानकारी – Nainital Tourist Guide In Hindi

10 नैनीताल दर्शनीय स्थल जिनका दीदार किए बिना आपकी यात्रा अधूरी है! नैनीताल में 11 सुन्दर घूमने की जगह | Nainital Tourist Places in Hindi : नैनीताल में घूमने की जगह और पर्यटन स्थल की जानकारी – Nainital Tourist Guide In Hindi

 उत्तराखण्ड राज्य के कुमाऊँ क्षेत्र का मुख्य पर्यटन स्थल नैनीताल को झीलों का शहर कहा जाता है। कल्पना कीजिए एक ऐसी जगह की जो पहाड़ों पर स्थित हो और हर तरफ से झीलों से घिरी हो। बर्फ से ढके पहाड़ जो आपको प्राकृतिक सौंदर्य में सराबोर कर देंगे। नैनीताल दर्शनीय स्थल आपको एक ऐसे माहौल के दर्शन कराऐंगे जो आपको मंत्र मुग्ध कर देंगे, जैसे आप एक अनोखे स्थान के निवासी हों। इतना खूबसूरत नज़ारा शायद ही आपको कहीं देखने को मिले।

10 नैनीताल दर्शनीय स्थल

झीलों से गिरता पारदर्शी जल आपकी आँखों को सुकून देगा। ताज़ी सरसराती हवा जब आपके चहरे को छूकर गुज़रेगी तब आप मन को लुभा लेने वाली ताज़गी का एहसास कर पाऐंगे। आइए चलते है नैनीताल भ्रमण पर जहाँ आपको केवल आनंद और उत्साह मिलेगा वो भी खूब सारी मात्रा में:

1. इको केव गार्डन

झूलते बगीचों एवं संगीतमय फव्वारों के लिए प्रसिद्ध यह गुफा 6 छोटी गुफाओं का मिश्रण है जिन्हें जानवरों के आकार में बनाया गया है। मुख्यतः ये नैनीताल दर्शनीय स्थल इसलिए बनाया गया है ताकि पर्यटकों को हिमालयी वन्यजीवों के प्राकृतिक वास की झलक से परिचय करवाया जाए। आपको अंदर जाने में थोड़ी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है पर पेट्रोल से जलते लैंप आपको आकर्षित करेंगे। यहाँ की प्रचलित गुफाएँ हैं- टाईगर केव, पैंथर केव, ऐप्स केव, बैट केव और फ्लाईंग फॉक्स केव।



2. नैनी झील


सात अलग-अलग पर्वत की चोटियों से घिरी यह झील कुमाऊँ क्षेत्र की सबसे प्रसिद्ध झील है। अपने खूबसूरत नज़ारों के लिए मशहूर यह नैनीताल दर्शनीय स्थल लोगों के बीच पिकनिक का बहुत प्रचलित स्थान है जहाँ बैठकर आप ढलते सूरज की विलुप्त होती लालिमा को देख पाऐंगे। शाम के वक्त आप ऐसे सौंदर्य पूर्ण वातावरण का गमन भी कर सकते है जहाँ आप झील में विचरण करते बत्तखों को भी देख पाऐंगे। आप झील के पास स्थित नैना देवी मंदिर के दर्शन करके मन को और अधिक शांति भी प्रदान कर सकते हैं।



3. मॉल रोड़

नैनी झील के सहारे बनी यह सड़क मल्लीताल व तल्लीताल को जोड़ती है। यहाँ आपको हर वक्त चहल-पहल का माहौल देखने को मिलेगा। उत्तराखण्डी संस्कृति व पारंपरिक स्वादिष्ट खाने का मिश्रण आपको यहाँ देखने को मिलेगा। खरीदारी के लिए भी यह उपयुक्त स्थान है जहाँ आपको सुंदर गर्म कपड़े आसानी से मिल जाऐंगे। तो फिर देर किस बात की है, आइए और नैनीताल को अपनी सेवा का अवसर दे दीजिए। नैनीताल के दर्शनीय स्थल में अगर आपने इस जगह को छोड़ दिया तो आप ज़रूर पछताऐंगे।

4.स्नो व्यू पॉइन्ट



दूध जैसी बर्फ से ढका हिमालय मन को लुभा लेनेवाला दृश्य आपकी आँखों के सामने ला देगा। इस नैनीताल दर्शनीय स्थल को देखकर आपका मन यकीनन नहीं भर पाएगा इसलिए इस मौका पर आप नैनीताल की फोटो लेना भूल ही नहीं सकते। समुद्र तल से 2270 मीटर ऊँचा यह बिंदु यात्रियों के बीच बेहद लोकप्रिय स्थान है। आपको ऐसा प्रतीत होने लगेगा कि हाथ ऊपर उठाते ही आपकी मुट्ठी में बादल कैद हो गए हों। आपके सामने होंगे ऊँचे बर्फीले पहाड़ और ऊपर होगी बादलों की सफ़ेद चादर, सोचकर ही मन गदगद हो रहा है।




5. टीफिन टॉप

नैनीताल के पर्यटन स्थल में शुमर यह जगह आपको पूरे नैनीताल का दृश्य दिखाएगी। चारों तरफ चीड़, ओक व देवदार से घिरा यह स्थल आपको खुशनुमा व शांति के वातावरण से रूबरू करवाएगा। अगर आप प्रकृति प्रेमी हैं तो आपको यहाँ भरपूर तसल्ली मिलेगी। तसल्ली भी ऐसी-वैसी नहीं, मन को आनंदमयी करने वाली। तो कोई क्यों यहाँ आना भूल सकता है और वैसे भी अगर आप यहाँ नहीं आए तो आपकी यात्रा अधूरी रह जाएगी। यह भी एक पिकनिक स्थल है और यहाँ कुछ रोमांचक कार्य भी किए जाते हैं जैसै पर्वतारोहण आदि तो आप इसे भूल तो सकते ही नहीं हैं।


6.नैना पीक

2615 मीटर की ऊँचाई के साथ यह नैनीताल की सबसे ऊँची चोटी है जो,सैलानियों के बीच आकर्षण का केंद्र है। साल भर बर्फ की चादर से ढके रहने वाले पहाड़ों को हरियाली युक्त पेड़ों ने घेरा हुआ है। तस्वीरें खींचने के शौकीन रखने वाले लोग यहाँ आकर अपनी इस इच्छा को पूरा कर सकते है। हाईकरों और ट्रैकरों के बीच यह स्थान बहुत प्रसिद्ध है। आप यहाँ अपने मित्रों के साथ या अपने साथी के साथ एक अच्छी छुट्टियाँ मना सकते है। सूर्योदय व सूर्यास्त के खूबसूरत नज़ारें देखने के लिए लोग यहाँ अकसर आते हैं।

7. पं.बल्लभ पंत ज़ू

विभिन्न प्रकार के पशुओं से लिप्त यह स्थान बहुत से जानवरों का निवास स्थान है जैसे-तेंदुआ, पहाड़ी लोमड़ी, भेड़िए, हिरन, हिमालयी काला भालू, सफ़ेद मोर और आदि। बहुत से विलुप्त होते पक्षियों को भी आप यहाँ से वहाँ पंख पसारते नज़र आऐंगे। 2100 मीटर की दूरी में फैला यह स्थान लंबे-लंबे घने पेड़ पशु-पक्षियों को रहने में सहायता करते हैं।



8. नयना देवी मंदिर

कहा जाता है कि इस जगह देवी सती के नेत्र गिरे थे इसलिए इस मंदिर का नाम नैना देवी रखा गया। हिंदुओं के प्रमुख तीर्थस्थलों में इसे भी शामिल किया गया है। यहाँ मौजूद पीपल का पेड़ शताब्दियों से लगा हुआ है जो लोगों में आकर्षण का केंद्र है। आप यहाँ आकर भक्ति में लीन हो सकते हैं। पहले मंदिर तक पहुँचने के लिए पैदल यात्रा करनी पड़ती थी पर अब यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए उड़नखटोलों की व्यवस्था की गई है ताकि श्रद्धालुओं को मुश्किल का सामना न






9.ज्योलिकोट

नैनी झील का प्रवेश द्वार कहा जाने वाला यह स्थान मनमोहने वाला नैनीताल दर्शनीय स्थल है। तरोताजा़ फल-फूलों व कई प्रकार की तितलियाँ का निवास स्थान यही है। प्रकृति से प्रेम करने वालों का यहाँ स्वागत है। आप यहाँ आकर रंग-बिरंगी तितलियों की तस्वीरें अपने कैमरे में कैद कर सकते है। बच्चे भी यहाँ आकर खूब लुत्फ़ उठा पाऐंगे और अपने छोटे से अवकाश को यादगार बना पाऐंगे। इन तितलियों की तरह आपका मन भी बेफिक्र होकर झूम उठेगा और आपके मन में खुशी की तरंगें चलने लगेगी।


10. जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क


हरियाली, शांत वातावरण, पेड़ों से गुज़रती ताज़ी हवा और उनके बीच विलुप्त होते पशु-पक्षी, इन सभी का संगम आपको एक ही स्थान पर और एक ही समय पर मिलेगा। हैरान होने वाली बात बिल्कुल नहीं है क्योंकि यहाँ जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क की बात हो रही है। अगर आप अक्टूबर से फरवरी के दौरान यहाँ आते हैं तो आपको यहाँ कुछ अनदेखे पक्षी देखने को मिलेंगे जो आप यहाँ के अलावा और कहीं नहीं देख पाऐंगे। यह सुनहरा अवसर है इसे आसानी से हाथ से जाने मत दीजिए।



नैनीताल के पर्यटक स्थल आपको ऊँची पहाड़ियों जितना ऊँचा उठा देंगे, जहाँ आप अपने सपने को सच करते हुए उड़ान भर सकते है। चमकता हुआ साफ पानी जिसमें आप सूर्य की परछाई एकदम साफ देख पाऐंगे। यहाँ आपको नम्र स्वभाव वाले पहाड़ी लोग मिलेंगे जिनकी वाणी की मिठास आपको पल भर में अपना बना लेगी। यहाँ का प्राकृतिक वातावरण तो अच्छा है ही, सांस्कृतिक और सामाजिक वातावरण में भी कोई कमी नहीं है। आप यहाँ बेहद आरामदायक तरीके से अपनी छुट्टियाँ बिता सकते हैं फिर चाहे अपने परिवार के साथ आएं या फिर मित्रों के साथ। नैनीताल को अपनी खातिरदारी करने का एक मौका दीजिए,आपको यकीनन खुशी का अनुभव होगा।


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प्रारंभिक व शुरुआती गणितीय गतिविधियां व ECCE के अंतर्गत आने वाली गतिविधियाँ

प्रारंभिक व शुरुआती गणिती गतिविधियां


गिनती

गिनती वस्तुओं की वास्तविक संख्या का पता लगाने के लिए है,जैसे-कितनी पेसिल हैं, कितनी रबर हैं, कितने लड़के हैं,
कितनी लड़कियाँ हैं, आदि। गिनती का अर्थ संख्याओं को क्रमबद्ध करना भी है- 1 के बाद 2 है. और 2 के बाद 3 है,
आदि। छोटे बच्चे अक्सर गिनती करते हुए संख्या छोड़ देते हैं या क्रम बदल देते हैं। उन्हें क्रम अनुसार वस्तुओं की गिनती
करने के लिए पर्याप्त मौके दिए जाने चाहिए। जब कोई बच्चा गिनती करना सीखता है, तो वह मात्रा, नाम और प्रतीक
के बीच संबंध बनाता है और वह संबंध मात्रा को अभिव्यक्त करता है। क्रम अनुसार संख्या का नाम जानने में भी गिनती
उन्हें मदद करती है। हाथ और पैर की उंगली का खेल संख्याओं के अनुक्रम को याद रखने की क्षमता को सुदृढ़ करता
है। बटन, कंकड़, मोती, पत्तियों जैसी ठोस वस्तुओं को एक सतह पर रखकर उनके नामों के साथ गिनती करते हुए बच्चों
को दिखाया जा सकता है। गिनती से संबंधित किसी कविता को भी हाव-भाव के साथ बच्चों को सिखाया जा सकता है
जिसमें बच्चे काफी आनंद लेते हैं।
...

आकृति/ पैटर्न बनाना


पैटर्न बनाना एक महत्वपूर्ण गतिविधि है। तार्किक
तरीके से कुछ चीजों का दोहराव ही पैटर्न है।
पैटर्न को पहचान कर बच्चे अनुमान लगा सकते
हैं- इसके बाद क्या आएगा? बच्चे समानता या
अंतर को देखकर पैटर्न का पता लगते हैं। पैटर्न
बनाना एक महत्वपूर्ण प्रारम्भिक गणितीय कौशल
है। बच्चे किसी भी वस्तु के साथ आकृति/पैटर्न
को बना सकते हैं जैसे- मोती, पत्थर, कंचे, पत्तियाँ,
फूल, लकड़ियाँ आदि। शरीर की गति (बॉडी मूवमेंट)
के साथ भी पैटर्न बनाया जा सकता है जैसेचुटकी-ताली आदि।


माप की अवधारणा


बच्चों में विभिन्न आकार व वजन आदि की तुलना करके माप की अवधारणा विकसित होती है, जैसे-कौन सी गुड़िया बड़ी
है, कौन सी लम्बी है, कौन से ब्लॉक (लकड़ी के गुटके) भारी हैं, आदि। जब वह एक बार यह सीख जाते हैं कि गिनती
कैसे करनी है, उसके बाद उन्हें गैर-मानक माप हेतु उपकरण जैसे हाथ, अंगुलियाँ, कोहनी, पैर, पेंसिल, छड़ी, आदि का
उपयोग करते हुए वस्तुओं को मापने के लिए प्रोत्साहित किया जा सकता है।
पूरा और आधा की अवधारणा (पज़ल/पहेली)
पहेलियाँ यह दर्शाती हैं कि कैसे एक पूरी वस्तु को विभिन्न भागों में विभाजित किया जा सकता है, और जब इन भागों
को एक साथ रखा जाता है, तो हमें पूरी वस्तु मिल जाती है। उदाहरण के लिए- किसी नाव की तस्वीर को 4 भागों में
काट दिया जाता है, या फूलों को भी विभिन्न भागों में काटा जा सकता है। इस अवधारणा को एक अन्य तरीके से बताने
के लिए कहानी सुनाई जा सकती है, जैसे- मेरे पास एक लड्डू है, और मैं इसे 4 बच्चों को देना चाहती हूँ। इसलिए मैं
इस लड्डू को 4 भागों में तोड़ती हूँ।

आंकड़ों का रख-रखाव



एक दिलचस्प गतिविधि के माध्यम से बच्चों को आंकड़ों का रख रखाव सिखाया जा सकता है। शिक्षक बच्चों से उनके
पसंदीदा फल के बारे में पूछे। जितने बच्चे आम कहते हैं उनको एक पंक्ति में रखें। वहीं जो बच्चे अमरुद कहते हैं उनको
अगली पंक्ति में और जो बच्चे केला कहते हैं उनको एक और अलग पंक्ति में रखें। इसके उपरान्त शिक्षक बोर्ड पर एक
शाफ खींच सकते हैं और कह सकते हैं- “देखिए हमने आपके पसंदीदा फलों के साथ एक ग्राफ बनाया है।
4
.
कोड नं0-90 राजीन प्रकाशन, प्रयागराज, वर्ष 2021-22 हेस,
वैज्ञानिक चिंतन व जिज्ञासा विकसित करने हेतु गतिविधियाँ
सरल गतिविधियाँ और प्रयोग, जो बच्चों को
विभिन्न वस्तुओं के विभिन्न गुणों को सीखने
में मदद करते हैं, उन्हें आसानी से आस-पास
उपलब्ध संसाधनों के साथ कक्ष में व्यवस्थित
किया जा सकता है। ये गतिविधियाँ इस प्रकार
से हो सकती हैं:
" डूबना और तैरना
" पत्तियों का वर्गीकरण
पानी में क्या घुलता है / क्या नहीं घुलता
है
पानी में रंग मिलाना
» गर्म होने वाले धातु और अधातु
" चुम्बक ( मैग्नेट) के साथ गतिविधियाँ

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SHARDA का फुल फॉर्म व उसका मतलब क्या है आउट ऑफ बच्चो से क्या तात्पर्य है

SHARDA का फुल फॉर्म व उसका मतलब क्या है आउट ऑफ बच्चो से क्या तात्पर्य है 


निःशुल्क और अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम-2009 के अन्तर्गत 06-14 आयु वर्ग के समस्त
बालक-बालिकाओं को निःशल्क प्रारम्भिक शिक्षा उपलब्ध कराये जाने का प्रावधान है। अधिनियम के अन्तर्गत यह भी
अपेक्षा की गयी है कि 06-14 आयु वर्ग के ऐसे बच्चे जिन्हें किसी विद्यालय में नामांकित नहीं किया गया है अथवा
नामांकन के उपरान्त वे अपनी प्रारम्भिक शिक्षा पूर्ण नहीं कर सके हैं उनका चिह्नीकरण करते हुए उनका नामांकन
आयुसंगत कक्षा में कराया जाये और अन्य विद्यार्थियों के समकक्ष लाने हेतु उन बच्चों को विशेष प्रशिक्षण देने की
व्यवस्था की जाये। अधिनियम के उक्त प्रावधान को प्रभावी रूप में क्रियान्वित करने हेतु समय-समय पर शासनदेशों के
माध्यम से जिलाधिकारी के निर्देशन में कार्यक्रम 'शारदा' (SHARDA-स्कूल हर दिन आयें) संचालित किए जाने के
निर्देश दिए गए हैं।
शैक्षिक सत्र 2021-22 में कार्यक्रम 'शारदा' के संचालन के बन्ध में निर्देश निम्नलिखित हैं.


 लक्षित समूह 

SHARDA FULL FORM= SCHOOL HAR DIN AAYE 

'शारदा' (SHARDA स्कूल हर दिन आयें) के अन्तर्गत जनपद में 5' से 14 आयुवर्ग के समस्त आउट ऑफ स्कूल
बच्चे लक्षित समूह हैं। आउट ऑफ स्कूल बच्चे 02 श्रेणी के हो सकते हैं:

1.ऐसे बच्चे जिनका विद्यालय में कभी भी नामांकन नहीं किया गया हो।
2. ऐसे बच्चे जिनका विद्यालय में पूर्व में नामांकन हुआ था किन्तु किन्हीं कारणवश अपनी शिक्षा पूरी किये
बिना विद्यालय छोड़ गये अर्थात ड्राप आउट हो गये।
ड्राप आउट बच्चों के चिन्हीकरण की प्रक्रिया को सुस्पष्ट करने के उद्देश्य से राज्य सरकार द्वारा आउट ऑफ स्कूल बच्चों
का निम्नवत परिभाषित किया गया है:- "06 से 14 वर्ष की आयु का कोई बालक बिना विद्यालय का माना जायेगा. यदि
वह किसी प्राणम्भक विद्यालय में कभी नामांकित न किया गया हो/की गयी हो अथवा यदि नामांकन के पात्
अनुपस्थित होने के कारणों की पूर्व सूचना के बिना विद्यालय से निरन्तर 45 दिन या उससे अधिक अवधि में अनुपस्थित रही हो


अभिभावकों को प्रेरित करने हेतु संवेदीकरण (Triggering )



आउट ऑफ़ स्कूल बच्चों के चिह्नांकन हेतु एस.एम्.सी. सदस्यों एवं अध्यापकों द्वारा मोहल्ला बैठकों का आयोजन
किया जायेगा। जिनमें नेहरू युवा केंद्र/एन.एस.एस./स्काउट गाइड के कार्यकर्ताओं का भी यथासंभव सहयोग लिया
जायेगा। मोहल्ला बैठकों में निम्न बिन्दुओं पर शिक्षा के महत्व के संबंध में चर्चा की जायेगी तथा समुदाय को प्रेरित
किया जाएगा
  1.  सभी बच्चों को स्कूल में पढ़ाना क्यों जरूरी है?
  2. सभी बच्चों को रोज स्कूल भेजना क्यों जरूरी है?
  3. बच्चों के स्कूल न जाने से क्या-क्या नुकसान है?
  4. क्या स्कूल में जो सिखाया जाता है, वह बाहर भी सीख सकते है?
  5. क्या बिना पढ़े-लिखे कोई अच्छा इन्सान/ अधिकारी बन सकता है?
  6. पढ़े-लिखे बच्चे और बिना पढ़े-लिखे बच्चे में क्या-क्या अंतर होता है?


क्या आपको पता है, 5' से 14 वर्ष का बच्चा पढ़ाई बीच में छोड़ चुका है तो क्या वह फिर से स्कूल में पढ़ने जा
सकता है?
आपके मोहल्ले से कितने बच्चे स्कूल में पढ़ने जाते है?
आपके मोहल्ले से 5 से 14 वर्ष के कितने बच्चे स्कूल में पढ़ने नहीं जाते है ?

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घर कितने प्रकार के होते है | मिट्टी के घर, तैरते हुए घर , पत्थर के घर

आपने अपने आस-पास तरह-तरह के घर देखे होंगे। इनमें से कुछ घर कच्चे होते हैं तो
कुछ घर पक्के। कुछ एक मंजिला या दो मंजिला होते हैं तो कहीं-कहीं बहुमंजिला इमारत दिखाई
देती हैं। इन भिन्नताओं के अलावा और भी कई तरह के घर बनाए जाते हैं। क्षेत्र विशेष की
जलवायु / मौसम के आधार पर भी घर के स्वरूप या बनावट में अन्तर दिखाई पड़ता है।

अलग-अलग क्षेत्रों में घर बनाने में प्रयुक्त होने वाली सामग्री भी अलग-अलग होती है।
बाँस का घरइस तरह के घर उन स्थानों पर बनाए जाते हैं
 जहाँ
बहुत अधिक बारिश होती है। ऐसे स्थानों पर घर जमीन से
10-12 फीट की ऊँचाई पर बाँस के मजबूत खम्भों पर बनाए
जाते हैं। बाँस अधिक समय तक पानी में रहने पर भी नहीं 
सड़ता हैं। ये घर अन्दर से भी लकड़ी के बने होते हैं।

बर्फ के घरऐसी जगह जहाँ चारों ओर केवल बर्फ ही बर्फ होती है, वहाँ
लोग बर्फ की सिल्लियों के घर बनाते हैं। ऐसे घर को 'इग्लू' कहते हैं।
ऐसे घर की दीवारें अंदर से छूने पर ठंडी तो लगती हैं, पर वे बाहर
गिरती बर्फ और ठंडी हवा को अन्दर नहीं आने देती। इसके अंदर
आग जलाई जाती है जिससे घर गर्म रहता है।



आपने अपने आस-पास तरह-तरह के घर देखे होंगे। इनमें से कुछ घर कच्चे होते हैं तो
कुछ घर पक्के। कुछ एक मंजिला या दो मंजिला होते हैं तो कहीं-कहीं बहुमंजिला इमारत दिखाई
देती हैं। इन भिन्नताओं के अलावा और भी कई तरह के घर बनाए जाते हैं। क्षेत्र विशेष की
जलवायु / मौसम के आधार पर भी घर के स्वरूप या बनावट में अन्तर दिखाई पड़ता है।
अलग-अलग क्षेत्रों में घर बनाने में प्रयुक्त होने वाली सामग्री भी अलग-अलग होती है।

बाँस का घरइस तरह के घर उन स्थानों पर बनाए जाते हैं जहाँ
बहुत अधिक बारिश होती है। ऐसे स्थानों पर घर जमीन से
10-12 फीट की ऊँचाई पर बाँस के मजबूत खम्भों पर बनाए
जाते हैं। बाँस अधिक समय तक पानी में रहने पर भी नहीं
सड़ता हैं। ये घर अन्दर से भी लकड़ी के बने होते हैं।

बर्फ के घरऐसी जगह जहाँ चारों ओर केवल बर्फ ही बर्फ होती है, वहाँ
लोग बर्फ की सिल्लियों के घर बनाते हैं। ऐसे घर को 'इग्लू' कहते हैं।

ऐसे घर की दीवारें अंदर से छूने पर ठंडी तो लगती हैं, पर वे बाहर
गिरती बर्फ और ठंडी हवा को अन्दर नहीं आने देती। इसके अंदर
आग जलाई जाती है जिससे घर गर्म रहता है।



मिट्टी के घर



ऐसे स्थान जहाँ बारिश बहुत कम होती है तथा अत्यधिक
गर्मी पड़ती है, वहाँ लोग मिट्टी के घर बनाकर रहते हैं। घर की
दीवारें बहुत मोटी होती हैं। मिट्टी सूर्य की गर्मी से सूखकर कठोर
हो जाती है। मोटी दीवारों के कारण गर्मी घर के अंदर नहीं आ
पाती है।

तैरते हुए घर



इस प्रकार के घर लकड़ी के डोंगे की भाँति बने होते
हैं। ये नावों की तरह पानी में तैरते रहते हैं। इसलिए इसे तैरते
हुए घर या हाउसबोट भी कहते है।


इसे भी जानें -
चीन में बहुत से लोग नाव पर बने घरों में रहते, खाते-पीते और सोते हैं। यह अपने लिए
इसी पर सब्जियाँ उगाते हैं और मुर्गियाँ भी पालते हैं। इन घरों को 'सामपान' कहते हैं।


पत्थर के घर



ऐसे घर पर्वतीय क्षेत्रों में दिखते हैं। इस प्रकार के घर
पत्थरों को काटकर उन्हें एक के ऊपर एक रखकर बनाए
जाते हैं। पत्थरों के ऊपर मिट्टी और चूने की पुताई की
जाती है। पर्वतीय क्षेत्रों में बारिश बहुत अधिक होती है तथा
बर्फ भी गिरती है। अतः ऐसी जगह पर घरों की छत सपाट
नहीं बनाई जाती है। इन घरों की छत ढलवा होती है।


घुमन्तू लोगों के घर



ऐसे लोग जो हमेशा एक जगह पर स्थायी रूप से नहीं
रहते हैं, वे इस प्रकार के घर में रहते हैं। इन्हें जहाँ ठहरना
होता है, वहाँ ये अपना घर अस्थायी रूप से टेन्ट आदि की।
मदद से बना लेते हैं। कभी-कभी लोग आवश्यकतानुसार भी
इस तरह के घर बनाकर रहते हैं। जैसे बाढ़ या भूकम्प वाले
क्षेत्रों में लोग प्रायः इस तरह के घर बनाकर रहते हैं।






मासिक समीक्षा बैठक का DCF और FEEDBACK फॉर्म लिंक :: KPI कैसे पूरा करे

मासिक समीक्षा बैठक का DCF और FEEDBACK फॉर्म लिंक :: KPI कैसे पूरा करे

 मासिक समीक्षा बैठक का DCF और FEEDBACK फॉर्म लिंक :: KPI कैसे पूरा करे 



मासिक बैठक के पहलू :

1.उपस्थित व्  उद्देश्य -

सभी टीचर्स की उपस्थित अनिवार्य है और सभी टीचर्स अपने स्कूल में कराये जाने वाली एक्टिविटी से सम्बंधित TLM या अन्य  सामग्री  का प्रदर्शन करेंगे जिससे सभी आये हुए शिक्षक उस चीज का अवलोकन करे और वापस जाकर सभी लोग अपने अपने विद्यालय में उस एक्टिविटी को  लागू करे 


2. 2 WAY कम्युनिकेशन  -

मिशन प्रेरणा के अंतर्गत सभी  टीचर्स अपने अपने मन की बात इस मीटिंग में रख सकते है .. एक पक्षीय नही बल्कि दो  पक्षीय वार्तालाप होंगी जहा सभी टीचर्स स्वतंत्र रूप से अपने पक्ष रख सकते है अपनी अपनी राय दे सकते है 

3. App इंस्टालेशन -

मिशन प्रेरणा के अंतर्गत सभी  टीचर्स अपने अपने मोबाइल में कुछ एप जो की मिशन प्रेरणा के  पूरक एप है वो होने ही चाहिए 
जैसे 

4.  हस्त्पुस्तिकाओ का प्रयोग-

मिशन प्रेरणा के अंतर्गत सभी  टीचर्स अपने अपने स्कूल में इस पुस्तिअको के अंतर्गत की पठन का कार्य करवाएंगे  और इन तीनो पुस्तिकाओ की मदद से  आप अपने स्कूल में बहुत सारी एक्टिविटी भी करवा सकते है 
ये तीनो पुस्तिकाए स्कूल में एक स्तम्भ की बहती कार्य करती है 
1 . आधारशिला 
2.शिक्षण संग्रह 
3. ध्यानाकर्षण 

5 .  शिक्षक डायरी -

मिशन प्रेरणा के अंतर्गत सभी  टीचर्स अपनी अपनी डायरी प्रतिदिन भरकर आएंगे और उसी के अनुसार क्लास का सञ्चालन होंगा पुरे दिन आपको उसी के अनुसार क्लास टीचिंग करनी होंगी यदि बने हुवा पालन पूरा नही हो पता है उस दिन वो प्लान नेक्स्ट डे के लिए शिफ्ट हो जायेंगा फिरSAME  वर्क आपको दुसरे दिन करवाना होना 

उसके बाद में सभी लोग  अपने डायरी  लिखेंगे की सभी कार्य संपदित हुए |

शिक्षक डायरी कैसे भरे :: https://youtu.be/2GIS2kvNPxE

6 .  मैथ्स किट का प्रयोग -

मिशन प्रेरणा के अंतर्गत सभी  टीचर्स  मैथ्स किट का प्रयोग जरुर करेंगे . मैथ किट में ग्यारह प्रकार की सामग्री दी हुई है 

ये सामग्री भुत ही USEFUL है आप सभी लोगो का मैथ किट का प्रयोग हर हॉल में करना ही है 


7.  साप्ताहिक क्विज करवाना -

मिशन प्रेरणा के अंतर्गत सभी  टीचर्स   को अपने अपने स्कूल में क्विज हर सप्ताह में शनिवार  को करवाना ही है  क्विज में यदि सभी बच्चे एक साथ सभी का नही हो पता है आप उनको सोमवार से लेकर शुक्रवार तक भी करवा सकते है अपने अनुसार |
हर रोज कुछ बच्चो का धीरे धीरे करके अगले शनिवार तक करवा सकते है 



8. DCF FORM व्  FEEDBACK FORM भरवाना -


मिशन प्रेरणा के अंतर्गत सभी  टीचर्स , मासिक समीक्षा बैठक में फीडबैक फॉर्म जरुर भरे जिसका लिंक मई नीचे दे दूंगा और DCF सभी संकुल टीचर को  भरना है ये दोनों काम हर बैठक में अनिवार्य रूप से होंगे 

फीडबैक फॉर्म लिंक : FEEDBACK FORM

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प्रेरणा DBT एप यूजर मैन्युअल: कैसे PRERNA DBT App पर बच्चो का रिकॉर्ड कैसे फीड करे - समझे एक एक बिन्दु

प्रेरणा  DBT एप यूजर मैन्युअल: कैसे PRERNA DBT App पर बच्चो का रिकॉर्ड कैसे फीड करे - समझे एक एक बिन्दु

 प्रेरणा  DBT एप यूजर मैन्युअल: कैसे PRERNA DBT App पर बच्चो का रिकॉर्ड कैसे फीड करे - समझे एक एक बिन्दु 

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1.

डीबीटी ऐप को डाउनलोड करने के लिए गूगल प्ले स्टोर पर जाकर प्रेरणा डीबीटी ऐप को सर्च करें एवं इंस्टॉल के बटन पर क्लिक करें

यदि आपके फोन में पहले से ऐप इंस्टॉल है तो इसको डिलीट कर ले उसके पश्चात प्रेरणा डीबीटी ऐप को इंस्टॉल करें
2.

इंस्टॉल करने के बाद आपके फोन में प्रेरणा डीबीटी ऐप का एक आइटम दिखेगा इस आइटम पर क्लिक करके डीबीटी ऐप को ओपन करें
3.


ओपन करने के पश्चात इसमें अपना मोबाइल नंबर डालें जिस नंबर पर आपको एमडीएम आईवीआरएस कॉल आती है और लॉगिन करें
लागिन प्रक्रिया के दौरान आप अपने इच्छा अनुसार 4 अंकों का पिन सेट करें सेट करने के प्रचार रजिस्टर के बटन पर क्लिक करें इसके बाद जो पिन आप ने बनाया था उस दिन को डालते हुए प्रेरणा डीबीटी ऐप में लॉग इन करें
4.

लॉग इन करने के पश्चात अगली स्क्रीन पर आपको अपनी इंफॉर्मेशन में डीवीटी नाम का आइकॉन दिखाई देगा क्लिक करने के बाद अगली स्क्रीन पर आपके विद्यालय में कार्यरत सभी शिक्षकों का  विवरण दिखाई देगा

5.

यदि आपके विद्यालय में कोई शिक्षक किसी कारण से ट्रांसफर हो गए हैं या सस्पेंड हो गए हैं या किसी कारण से विद्यालय में कार्य नहीं नहीं तो आप उनको रिमूव टीचर बटन के द्वारा डिलीट करें

यदि कोई टीचर विद्यालय में कार्यरत हैं लेकिन उनका नाम मोबाइल नंबर ऐप में प्रदर्शित नहीं हो रहा है तो ऐड न्यू टीचर के बटन पर क्लिक करें टीचर की पूछी गई जानकारी को भरकर ऐड टीचर बटन पर क्लिक करें
6.


यदि कोई अन्य टीचर आपके विद्यालय में कार्यरत है लेकिन उनका नाम मोबाइल नंबर ऐड में प्रदर्शन नहीं हो रहा तो न्यू टीचर के बटन पर क्लिक करें
एड न्यू टीचर के बटन पर क्लिक करने के उपरांत आपको अपने अध्यापक का नाम उनका पद उनका 10 नंबर का मोबाइल नंबर और एचआरएमएस कोड जो कि मानव संपदा से मिला है उसको दर्ज करते हुए टीचर के बटन को दबाएं
सभी शिक्षकों का विवरण भरने के उपरांत नीचे दिए गए सत्यापन के बाद को क्लिक करते हुए नेक्स्ट के बटन पर क्लिक करते हुए आगे बढ़े
7.




8.

आपके द्वारा वेरीफाई किया गया सभी बच्चे इस प्रकार प्रदर्शित होंगे

सभी बच्चों को वेरीफाई करने के उपरांत सत्यापित करते हुए नेक्स्ट  बटन पर क्लिक करें
9.



लॉग इन करने के पश्चात आपको इस तरह की स्क्रीन प्रदर्शित होगी आपकी इंफॉर्मेशन और डीबीटी का ऑप्शन प्रदर्शित होगा 

डीबीटी के ऑप्शन पर क्लिक करके आप आगे की प्रक्रिया कर सकते हैं
10.

प्रदर्शित स्क्रीन पर कक्षा का चयन करते हुए स्वयं को आवंटित करने के लिए क्लास के आगे दिए गए चेक बॉक्स पर क्लिक करते हुए हरे रंग के नेक्स्ट बटन पर क्लिक करके आगे बढ़

नोट( आप एक या अधिक कक्षा का भी आवंटन कर सकते हैं)
11.







 यदि आपको किसी का अच्छा तो स्वयं का आवंटन रद्द करना है तो उसके नीचे लिखे "आवंटन रद्द करने हेतु यहां क्लिक करें "पर क्लिक करें इसके पश्चात जिस भी कक्षा का आवंटन रद्द करना है उसके सामने दिए गए चेक बॉक्स पर क्लिक करके आवंटन रद्द करने पर क्लिक करें

12.

नेक्स्ट बटन क्लिक करने के बाद आपको डैशबोर्ड प्रदर्शित होगा जिसमें आपको छात्र छात्राओं के अभिभावकों के आधार सत्यापन वहां रिपोर्ट को देखा जा सकता है

छात्रों और अभिभावकों का आधार सत्यापन उनके बैंक खाता संख्या को जानकारी भरने हेतु यहां पर क्लिक करें

सत्यापन के उपरांत प्रमाणित व सत्यापन पूर्ण हो ना हो पाने के कारण प्रमाणित छात्रों का विवरण देखने के लिए क्लिक करें

शिक्षक के साथ द्वारा बीईओ को भेजे गए प्रमाणित छात्र-छात्राओं का विवरण हुआ बीईओ द्वारा अस्वीकृत छात्र/ छात्राओं की लिस्ट देखने हेतु यहां क्लिक करें

पीएफएमएस पोर्टल द्वारा बैंक खाता आधार लिंकेज रिपोर्ट का भुगतान रिपोर्ट की लिस्ट देखने के लिए यहां पर क्लिक करें

13.

छात्र छात्रा के अभिभावक का आधार सत्यापन करने है "विवरण भरे "पर क्लिक करें

डैशबोर्ड पर अंकित प्रमाणीकरण मॉडल पर क्लिक करें

इस पर क्लिक करने के उपरांत आपको स्वयं को आवंटित कक्षा में  नामांकित सभी छात्र छात्राओं को सूचित प्रदर्शित होगी

14.

इस स्क्रीन पर प्रदर्शित चयनित छात्र छात्रा का प्रेरणा पोर्टल पर अंकित पूर्ण विवरण प्रदर्शित होता है इसमें अतिरिक्त पहुंची गई जानकारी को बहुत ध्यान पूर्वक बताएं

आपको छात्र छात्रा की किसी भी जानकारी में कोई बदलाव करना है तो इस अनुभाग के अंत में पूछे गए प्रश्न को याद करते हुए बदलाव की जानकारी वाली फील्ड के आगे सही जानकारी भरें

15.


सर्व प्रथम अभिभावक को इस डीबीटी की प्रक्रिया व इसमें एकत्रित की जाने वाली सूचना की जानकारी देते हुए सहमत बॉक्स को सेलेक्ट करना है
1. फील्ड अभिभावक का छात्र से संबंधित की जानकारी दी जानी है
2. यदि आधार की मूल प्रति उपलब्ध है तो आधार कार्ड स्केनर का प्रयोग करते हुए आधार पर बने क्यूआर कोड को स्कैन करके जानकारी भरें
3. छायाप्रति उपलब्ध है 6 अप्रैल से मिलान करते हुए पूछी गई सभी जानकारी को बहुत ध्यान पूर्वक भरा जाना है
नोट-- आधार कार्ड पहन के माता पिता के नाम की स्पेलिंग हूबहू यहां भरे
4. सभी जानकारी भरने के उपरांत नीचे रंग के बटन पर लिखे "क्लिक टू वेरीफाई आधार "पर क्लिक करें

16.

अभिभावक के आधार सत्यापन हो जाने के उपरांत अभिभावक की बैंक खाता पासबुक की छायाप्रति मूल प्राप्त करते हुए अभिभावक के आधार नंबर से जुड़े बैंक खाता का विवरण इस अनुभाग में भरा जाना है
@ आपको सिर्फ आई एफ एस सी कोड व उसका बैंक खाता संख्या भरना होगा
@ यह जानकारी देने के उपरांत आपको अपडेट एंड सेव बटन पर क्लिक करते हुए फॉर्म को सबमिट करना है


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छात्र के अधिकारों का आधार सत्यापन का बैंक खाता की जानकारी भरने के उपरांत आपको पुनः इस अनुभाग में जाकर चयनित छात्र छात्रा के आगे वेरीफाई बटन पर क्लिक करते हुए प्रमाणित करना है

18.


आप अपने द्वारा प्रमाणित किए हुए छात्र छात्राएं इस रिपोर्ट में देख सकते हैं

जिन भी छात्र छात्रा के अभिभावकों का आधार सत्य एवं पूर्ण नहीं हो पाया उनकी सूची प्रमाणित छात्र-छात्रा में देख सकते हैं

बीईओ को भेजे गए प्रमाणित छात्रों की रिपोर्ट इस जगह देखी जा सकते हैं

19.


आपके द्वारा भरी गई संपूर्ण जानकारी को सरवर प्रसन्न होने की रिपोर्ट यहां से प्राप्त की जा सकती है

पीएमएफएस द्वारा आधार अनसीडेड बैंक खाता की सूची यहां पर प्रदर्शित होती है इस सूची में उपलब्ध सभी छात्र छात्राओं के अभिभावकों को अपने बैंक खाते को आधार से लिंक करवाने की जानकारी देते हुए उन को पुनः सत्यापित किया जाना होगा

जो डाटा सर्वर पर नहीं भेजा जगह है उसे "सर्वर पर नहीं भेजे गए रिपोर्ट "पर क्लिक करके Click here to Sync पर क्लिक  करें


किसी भी प्रकार की समस्या के लिए ईमेल आईडी
prernadbt@gmail.com पर भेज सकते हैं

इसके अलावा आप टोल फ्री नंबर 18001800666 पर कॉल करके भी अपनी समस्या का समाधान प्राप्त कर सकते हैं
























 















सर्च इंजन किसे कहते है Top 10 सर्च के बारे में जाने || TOP TEN SEARCH ENGINE

सर्च इंजन किसे कहते है Top 10 सर्च के बारे में जाने ||   TOP TEN SEARCH ENGINE

 सर्च इंजन किसे कहते है Top 10 सर्च के बारे में जाने 


ऐसे कम्प्यूटर प्रोग्राम खोज इंजन (खोजी इंजन) (search engine) कहलाते हैं जो किसी कम्प्यूटर सिस्टम पर भंडारित सूचना में से वांछित सूचना को ढूंढ निकालते हैं। ये इंजन प्राप्त परिणामों को प्रायः एक सूची के रूप में प्रस्तुत करते हैं जिससे वांछित सूचना की प्रकृति और उसकी स्थिति का पता चलता है


जी हाँ SEARCH ENGINE ही वो माध्यम है, जो हमारे लिये web पर जानकारी को खोजने का काम करते है. इंटरनेट पर लाखों websites मौजूद है और वो सभी हमारे लिए कुछ न कुछ जानकारी उपलब्ध कराते है. पर जरा सोचिए अगर Search Engine नही होते तो आपको कैसे पता लगता की उस specific topic की जानकारी किस वेबसाइट पर मिलेगी.


तो अगर आप यह जानने में interested है कि सर्च इंजन किसे कहते है? सर्च इंजन कौन से है? सर्च इंजन कैसे काम करते है? सर्च इंजनों का महत्व क्या है? बस इस पोस्ट को अंत तक पढ़े सारे सवालों के जवाब आपको मिल जाएंगे. चलिये पोस्ट की शुरुवात सर्च इंजन की परिभाषा के साथ करते है.


Search engine एक Web based tool अथवा Software है, जो internet users को World Wide Web पर information search करने में मदद करता है. उदाहरण के लिये Google, Bing, Yahoo, Baidu और Yandex लोकप्रिय खोज इंजन है. जब उपयोगकर्ता search bar में कोई शब्द type करता है, तो उसे Keyword कहा जाता है. इन्ही कीवर्ड और key phrase के आधार पर search engines उपयोगकर्ता के सामने वेब परिणामों की लम्बी सूची प्रदर्शित करते है.




archive.org एक इंटरनेट आर्काइव सर्च इंजन है। इसके जरिए आप पता लगा सकते हैं कि कोई वेबसाइट 1996 के बाद से कैसे बदली है। 


Ecosia search engine बर्लिन, जर्मनी में स्थित है और 2009 में क्रिश्चियन क्रोल द्वारा स्थापित किया गया है। यह कई users के लिए Google के विकल्प मैं अच्छा search engine हो सकता है। इसका कारण है, की इस सर्च engine का user interface बहुत clean है, और यह काफी हद तक Google search engine के जैसा है।


Yandex को Russia के सबसे popular search engine का दर्जा मिला हुआ है. जिस तरह google भारत मे छाया है वैसे ही Yandex Russia में प्रसिद्ध है. इसकी शुरुआत Arkady valozh और Arkady Borkovsky ने 1997 में की थी. खोज इंजन के अलावा यह कई दूसरी services भी प्रदान करता है. भारत मे इसका market share मात्र 0.01% है. Yandex पर जानकरी खोजना गूगल की ही तरह आसान है.


बाइदु को 2000 में शुरू किया गया और यह चीन में सबसे ज्यादा चलने वाले सर्च इंजन है। हर महीने इसके जरिए अरबों सवालों के जवाब सर्च किए जाते हैं। वैसे चीन में इंटरनेट पर कई तरह की बंदिशें हैं।



इस सर्च इंजन के बहुत फायदे हैं। मसलन यह यूजर्स को ट्रैक नहीं करता। यह पूरी तरह विज्ञापन से नहीं भरा है और इसमें कई अच्छे फीचर हैं। फिर भी यह ज्यादा लोकप्रिय नहीं है।



AOL एक American web portal और online service provider कंपनी है. हालांकि AOL search engine का भारत मे उतना उपयोग नही होता परन्तु हिंदी सर्च के हिसाब से यह एक बेहतरीन खोज इंजन है. इसमे लाखो हिंदी वेबसाइट और ब्लॉग उपस्थित है, जो आपको हिंदी भाषा मे जानकरी मुहैया कराते है. search engine market में इसका करीबन 0.06 % शेयर माना जाता है.


लगभग तीन प्रतिशत लोग अपने सवाल आस्क.कॉम से पूछते हैं। यह सर्च इंजन सवाल-जवाब वाले फॉर्मेट पर आधारित है, जहां जवाब अन्य यूजर देते हैं। जनरल सर्च का विकल्प भी इसमें होता है, लेकिन रिजल्ट उतने अच्छे नहीं मिलते।


Bing को Microsoft द्वारा बनाया गया है. माइक्रोसॉफ्ट के CEO Steve Ballmer ने वर्ष 2009 में इसकी शुरुवात की थी. गूगल के बाद बिंग लोकप्रिय search engine की list में दूसरे नंबर पर आता है. माइक्रोसॉफ्ट ने bing को अपने पुराने सर्च इंजन Live search और MSN search से replace किया था. बिंग को अक्सर गूगल के प्रतियोगी के रूप में देखा जाता है.

परन्तु वास्तव में इन दोनों की कोई तुलना नही है. Search engine market share की लगभग 2.38% हिस्सेदारी के साथ बिंग दूसरे नंबर पर है.



दुनिया के बडे search engine में yahoo भी एक जाना माना नाम है. एक सर्च इंजन और portal होने के अलावा याहू कई अन्य service भी मुहैया कराता है. yahoo mail इनमे से सबसे प्रशिद्ध है. google के साथ तुलना में yahoo उतने fast और exact result नही दिखा पाता है और शायद इसीलिए सर्च इंजन के रूप में यह इतना preferable नही है



इसमे कोई शक नही कि Google दुनिया का सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाला Search engine है. गूगल में per second लगभग 63000 searches होती है. जरा सोचिये प्रति सेकंड इतनी बार सर्च किया जाता है, तो रोज और पूरे साल की संख्या क्या होगी. अगर इस नंबर के आधार पर देखे तो Google में per year लगभग 2 trillion searches होती है. गूगल की शुरुवात 1997 में American computer scientist Larry Page और Sergey Brin ने की थी.

गूगल के पास Search engine market share का लगभग  92.81% हिस्सा है गूगल के लोकप्रिय होने की सबसे बड़ी वजह इसका information database है, कुछ भी सर्च कीजिये आपको उसका तुरंत जवाब मिलेगा.





पुलिस वालों की वर्दी देखकर पहचाने उनका पद AND POLICE RANK | Full Details ACP/DCP/SSP/DSP/DIG And All||HOW TO RECOGNIZE THE RANK AND BADGE OF INDIAN POLICE - Full Details ACP/DSP/ DCP/IG/SSP/DGP

 पुलिस वालों की वर्दी देखकर पहचाने उनका पद AND POLICE RANK | Full Details ACP/DCP/SSP/DSP/DIG And All||HOW TO RECOGNIZE THE RANK AND BADGE OF INDIAN POLICE - Full Details ACP/DSP/ DCP/IG/SSP/DGP

 पुलिस वालों की वर्दी देखकर पहचाने उनका पद | Full Details ACP/DCP/SSP/DSP/DIG  AND POLICE RANK





भारतीय पुलिस में अलग-अलग रैंक के अफसर होते हैं। लेकिन ज्यादातर लोग इन सभी के बारे में नहीं जानते हैं। वैसे ये कोई बहुत जटिल काम नहीं है और आप इनके बैज को देखकर पता लगा सकते है कि इनमें फर्क क्या है। आम जनता के साथ-साथ ये जानकारी ऐसे कैंडिडेट्स के लिए भी लाभकारी हैं जो इंडियन पुलिस को ज्वाइन करना चाहते हैं या उससे जु़ड़ने जा रहे हैं। उनके लिए इन रैंक और बैज के बीच का फर्क पता होना अनिवार्य है। इस खबर में हम आपको इनकी रैंक्स और इनके बैज के बारे में बताने जा रहे हैं।

INDIAN POLICE NON-GAZETTED OFFICERS




1. CONSTABLE

पुलिस कांस्टेबल की रैंक भारत की पुलिस फ़ोर्स में सबसे कम रैंक होती है, जो कि Senior Constable के नीचे आते हैं|भारतीय पुलिस फाॅर्स में कांस्टेबल को उसके इस बैच से पहचान सकते हैं|


2. SENIOR CONSTABLE

सीनियर कांस्टेबल को आप उसके कंधे पर दिए गये इस बैच से पहचान सकते हैं, जिसमें कि 2 पीली पट्टियाँ या फिर बाजू में 2 लाल रंग के तीर जैसे निशान होते हैं|जो कि हेड कांस्टेबल के जैसे ही होते हैं, लेकिन सीनियर कांस्टेबल के कंधे या बाजू पर सिर्फ दो ही पट्टियाँ या तीर होते हैं|

3. HEAD CONSTABLE

हेड कांस्टेबल को आप उसके कंधे पर दिए गये इस बैच से पहचान सकते हैं, जिसमें कि 3 पीली पट्टियाँ या फिर बाजू में 3 लाल रंग के तीर जैसे निशान होते हैं|



4.  ASSISTANT SUB INSPECTOR

हेड कांस्टेबल को आप उसके कंधे पर दिए गये इस बैच से पहचान सकते हैं, जिसमें कि 3 पीली पट्टियाँ या फिर बाजू में 3 लाल रंग के तीर जैसे निशान होते हैं|


5. SUB INSPECTOR

Inspector की तरह ही Sub-Inspector को भी आप उसके कंधे पर लगे लाल और नीली पट्टी वाले इस बैच से पहचान सकते हैं लेकिन Sub-Inspector के बैच में सिर्फ 2 स्टार लगे होते हैं|


6. ASSISTANT INSPECTOR (MAHARASTRA ONLY)

Inspector की तरह ही Assistant-Inspector को भी आप उसके कंधे पर लगे 3-स्टार वाले इस बैच से पहचान सकते हैं लेकिन Assistant Inspector के बैच में सिर्फ लाल पट्टी होती है|इस रैंक का पुलिस अधिकारी आपको सिर्फ महाराष्ट्र पुलिस में ही देखने को मिलेगा बाकि किसी भी राज्य पुलिस में Assistant Inspector नहीं होता|



GAZETTED OFFICER IN POLICE DEPARTMENT



7. INSPECTOR

भारतीय पुलिस फाॅर्स में इंस्पेक्टर एक 3-स्टार रैंक का अधिकारी होता है|जिसे कि आप उसके कंधे पर लगे इस बैच से पहचान सकते हैं जिसमें कि 3 स्टार के साथ 1 लाल और 1 नीली पट्टी भी होती है|


8. Assistant Superintendent of Police(1st and 2nd under trainee)



9.  D
eputy superintendent of police

Deputy Superintendent of Police (DSP) यानि कि उप पुलिस अधीक्षक एक 3-स्टार अधिकारी होता है|भारतीय पुलिस में DSP बनने के दो तरीके हैं, पहला तो है कि आप UPSC का exam देकर सीधे ही DSP बन सकते हैं|और दूसरा है प्रमोशन के जरिये, इसके लिए एक अधिकारी को कुछ समय तक इंस्पेक्टर के पड़ पर कार्य करना होता है| फिर प्रमोशन के जरिये वह DSP बन सकता है|DSP को आप उसके कंधे पर लगे 3-स्टार वाले बैच से पहचान सकते हैं|


10.  Additional superintendent of police

Additional Superintendent of Police एक IPS रैंक का पुलिस अधिकारी होता है|और सभी IPS अधिकारी Additional Superintendent of Police(ASP) यानि कि सहायक पुलिस अधीक्षक के रूप में ही अपना करियर शुरू करते हैं


11. Superintendent of police

Superintendent of Police (SP) या पुलिस अधीक्षक राज्य पुलिस सेवा या भारतीय पुलिस सेवा (IPS) का एक अधिकारी होता है। भारत में, बड़े शहरों (जैसे दिल्ली, मुंबई, बैंगलोर या हैदराबाद) या अत्यधिक आबादी वाले या नक्सल प्रभावित जिलों में एक SSP और छोटे जिलों में Superintendent of Police (SP) एक जिले के पुलिस बल के प्रमुख होते हैं। Superintendent of Police (SP) की रैंक Assistant Superintendent of Police (ASP) के ऊपर और Senior Superintendent of Police (SSP) के नीचे होती है|

SSP को आप उसके कंधे पर लगे बैच से पहचान सकते हैं, जिस पर कि 1 स्टार के साथ सत्यमेव जयते का राष्ट्रीय चिन्ह होता है|


12. Provincial police service


13. Senior superintendent of police

Senior Superintendent of Police (SSP) यानि कि वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को किसी भी राज्य या केंद्र शासित प्रदेश के बड़े महानगरीय जिलों में कानून व्यवस्था को बनाये रखें की जिम्मेदारी सौंपी जाती है| और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) के कंधे पर भी DIG की तरह ही सत्यमेव जयते का राष्ट्रिय चिन्ह होता है|पर SSP के कंधे पर सिर्फ 2 स्टार होते हैं|


14. Deputy inspector general of police

यह भारतीय पुलिस सेवा में एक स्टार रैंक है| इस रैंक के लिए सिर्फ उन भारतीय पुलिस सेवा (IPS) या राज्य पुलिस सेवा के अधिकारियों को promote किया जाता है, जिन्होंने वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) या पुलिस उपायुक्त के रूप में सफलतापूर्वक सेवा की है।

आप Deputy Inspector General of Police रैंक के अधिकारी को उसके कंधे पर लगे राष्ट्रीय चिन्ह सत्यमेव जयते के साथ में लगे तीन स्टार से पहचान सकते हैं|


15.  Inspector general of police

पुलिस महानिरीक्षक (IG) भी एक IPS रैंक का अधिकारी होता है। एक पुलिस महानिदेशक किसी भी राज्य के पुलिस पदानुक्रम में तीसरा सर्वोच्च रैंक रखता है, जो अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (ADGP) के पद से नीचे है, और पुलिस उप महानिरीक्षक (DIG) के ठीक ऊपर है। और IG का पहचान चिन्ह आप इस चित्र में देख सकते हैं|



16. Additional director general of police


अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (ADGP) एक IPS रैंक के अधिकारी होते हैं। और पुलिस महानिदेशक की तरह, ADGP एक 3-स्टार रैंक का पुलिस अधिकारी होता है| ADGP को पुलिस विभाग में DGP का जूनियर माना जाता है।



17.  Director general of police

 Director General of Police (DGP) एक IPS रैंक है,और  Director General of Police (DGP) एक 3 स्टार रैंक का अधिकारी होता है|पुलिस फ़ोर्स में  Director General of Police (DGP) अधिकारी DGP के नीचे आता है|



18. Director of intelligence bureau


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